NCP merger (सोर्सः सोशल मीडिया 
पुणे

Pune News: प्रफुल्ल, तटकरे, भुजबल, मुंडे…चौकड़ी की साजिश, बारामती में बड़ी महाभारत

NCP Merger: बारामती में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ, सुनेत्रा पवार ने शपथ ली और शरद पवार ने चार नेताओं पर साजिश के गंभीर आरोप लगाए।

आंचल लोखंडे

Baramati Political News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का बारामती में हुए विमान हादसे में आकस्मिक निधन होने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। अजीत के निधन के बाद राकां (एनसीपी) में भारी उथल-पुथल मची है और सत्ता के नए समीकरणों को साधने के लिए पार्टी के भीतर ही शह-मात का खेल शुरू हो गया है।

इसी बीच, अजीत की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। हालांकि, इस शपथ ग्रहण से ठीक पहले राकां के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने एक विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजनीति में खलबली मचा दी। अपने 15 मिनट के संबोधन में शरद पवार ने बिना नाम लिए, लेकिन स्पष्ट इशारों में चार नेताओं-प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे और पार्थ पवार को पूरे सियासी घटनाक्रम का “विलेन” करार दिया। पवार ने संकेत दिया कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला उनसे पूछे बिना ही इन नेताओं द्वारा लिया गया।

शरद पवार अलग-थलग

शरद पवार ने इससे पहले शनिवार सुबह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा, “शपथ ग्रहण होने वाला है या नहीं, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने खुद को और पवार परिवार को शपथ ग्रहण से पूरी तरह अलग कर लिया। उनका संदेश स्पष्ट था कि आज लिए जा रहे फैसलों के लिए पवार परिवार जिम्मेदार नहीं है, ताकि भविष्य में सत्ता परिवर्तन या किसी गलत निर्णय का ठीकरा परिवार पर न फूटे।

अंतिम संस्कार वाले दिन ही बनी रणनीति

दावा किया जा रहा है कि अजीत के अंतिम संस्कार के बाद उसी रात बारामती के ‘सिटी इन होटल’ में सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ के बीच एक गुप्त बैठक हुई। इसके तुरंत बाद पटेल और तटकरे मुंबई रवाना हुए और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास ‘वर्षा’ पर बैठक कर सुनेत्रा पवार की ताजपोशी का निर्णय लिया गया। शरद पवार ने इसे “हड़बड़ी में लिया गया फैसला” बताया।

12 तारीख को होना था विलीनीकरण

शरद पवार ने यह भी खुलासा किया कि दोनों एनसीपी गुटों (शरद पवार गुट और अजित पवार गुट) का विलीनीकरण तय हो चुका था और इसकी घोषणा 12 फरवरी को होनी थी। उन्होंने कहा, “अजीत की इच्छा थी कि दोनों राकां एक हो जाएं। इसके लिए 14 बैठकें हो चुकी थीं और जयंत पाटिल तथा अजित पवार के बीच अंतिम चर्चा भी सकारात्मक थी।”पवार ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेता (पटेल-तटकरे गुट) और भाजपा से जुड़े कुछ लोग यह विलीनीकरण नहीं चाहते थे, क्योंकि इससे सत्ता के केंद्र बदल जाते और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती। इसलिए अजीत की अंतिम इच्छा के विरुद्ध जाकर नई साजिश रची गई।

बारामती की ‘सत्ता’ और ‘सातबारा’ पर पवार का दावा

शरद पवार ने हाल ही में नीरा नदी का दौरा किया, जिसे महज संयोग नहीं माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, “बारामती” सत्ता का प्रतीक है और “सातबारा” मालिकाना हक का। पवार का संकेत था—“बारामती का सातबारा मैंने अजीत के नाम किया था, अब उनके जाने के बाद मूल मालिक के तौर पर मैं इसे वापस ले रहा हूं।” यह एक भावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश माना जा रहा है कि पार्टी और क्षेत्र पर उनकी पकड़ अभी भी मजबूत है।

‘दादा की विरासत को आगे बढ़ाऊंगी’

तमाम राजनीतिक हलचलों के बीच नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कार्यभार संभालते हुए कहा, “अजीत का जाना मेरे और पूरे महाराष्ट्र के लिए बड़ा आघात है। लेकिन उन्होंने मुझे संघर्ष और जनसेवा का जो मंत्र दिया है, वही मेरा आधार है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के संकल्प और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र के विकास के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर राज्य को प्रगति के पथ पर ले जाने का वादा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यशवंतराव चव्हाण के विचारों और अजित दादा की कार्यशैली को आगे बढ़ाएंगी।

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