अजित पवार और शरद पवार साथ (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
पुणे

'साहेब' से बात करो और.., अंकुश काकडे का बड़ा खुलासा! शरद-अजित को साथ देखना चाहते थे दादा

Ajit Pawar last wish: एनसीपी के प्रमुख अजित पवार की अंतिम इच्छा सामने आई। वे शरद पवार और अजित पवार गुट को एक करना चाहते थे। अंकुश काकडे का बड़ा खुलासा।

प्रिया जैस

NCP Merger News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है, लेकिन इस दुखद घड़ी के बीच उनकी एक ऐसी 'अंतिम इच्छा' सामने आई है, जो राज्य की राजनीति की दिशा बदल सकती थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अंकुश काकडे ने खुलासा किया है कि अजित दादा अपने जीते-जी पार्टी के दोनों गुटों (शरद पवार और अजित पवार गुट) को फिर से एक छत के नीचे देखना चाहते थे।

काकडे के अनुसार, दादा इस एकीकरण के लिए बेहद बेताब थे और उन्होंने इसके लिए बाकायदा प्रयास भी शुरू कर दिए थे। अंकुश काकडे ने बताया कि अजित पवार ने उनसे कहा था, 'अंकुश, विठ्ठल सेठ मणियार और श्रीनिवास पाटिल के 'साहेब' (शरद पवार) से बेहद पुराने और घनिष्ठ संबंध हैं। आप लोग साहेब से बात कीजिए और दोनों राष्ट्रवादी गुटों को एक करने का रास्ता निकालिए।

अंकुश काकडे ने बेहद भावुक होते हुए साझा किया कि वे और विठ्ठल सेठ इस दिशा में सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

मनपा चुनाव में विलय की अटकलों को मिला था बल

इससे पहले कि चाचा-भतीजे की यह राजनीतिक दूरियां आधिकारिक तौर पर खत्म होती, अजित दादा का निधन हो गया। हाल के समय में दोनों गुटों के बीच कड़वाहट कम होने के सकेत भी मिलने लगे थे। पुणे और चिववड़ के स्थानीय चुनावों में दोनों गुटों ने पिंपरी-भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा था, जिसने विलय की अटकलों को हवा दी थी।

जब पत्रकारों ने इस बारे में अजित दादा से सवाल किया था, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था। 'आपके मुँह में शक्कर पड़े। उनका यह सकारात्मक रुख स्पष्ट करता था कि वे परिवार और पार्टी की एकता को सर्वोपरि मान रहे थे।

लोगों को दी राजनीति के मोहजाल से बचने की सलाह

अपनी राजनीतिक विरासत के साथ-साथ अजित पवार ने आम जनता के लिए भी एक भावुक संदेश छोड़ा है। उन्होंने युवाओं और किसानों को राजनीति के मोहजाल से बचने की सलाह देते हुए कहा था कि खेती या जमीन बेचकर आए पैसे को राजनीति में बर्बाद न करें।

उन्होंने जोर दिया था कि लोग अपने बच्चों की शिक्षा और संस्कारों पर ध्यान दे, नशामुक्त रहें और अपने व्यवसाय को ईमानदारी से चलाएं। उनका यह अंतिम दर्शन अब महाराष्ट्र की राजनीति में एक अमिट याद बनकर रह गया है।

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