अजित पवार के अंतिम यात्रा का दृश्य (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

6 महीने पहले जिस एम्बुलेंस की चाबी सौंपी, आज उसी ने पहुंचाया श्मशान; रुला देगी अजित दादा की ये आखिरी कहानी

Ajit Pawar Last Rites: बारामती विमान हादसे में दिवंगत हुए अजित पवार की अंतिम यात्रा से एक भावुक कर देनी कहानी सामने आई है। जिस एंबुलेंस से उनके पार्थिव शरीर अस्पताल ले जाया गया, वह उनकी ही देन थी।

आकाश मसने

Ajit Pawar Ambulance Story: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ बारामती में संपन्न हुआ। इस दुखद विदाई के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। दरअसल, जिस एंबुलेंस में उनका पार्थिव शरीर ले जाया गया, वह खुद पवार की ही देन थी।

जब चालक नजीम काजी की भर आई आंखें

बारामती नगर परिषद में एंबुलेंस चालक के रूप में कार्यरत नजीम काजी के लिए गुरुवार का दिन उनके जीवन का सबसे कठिन दिन था। काजी ने नम आंखों से बताया कि करीब छह महीने पहले अजित पवार को पता चला था कि स्थानीय निकाय के पास दशकों पुरानी एंबुलेंस है, जिससे मरीजों को असुविधा होती है। पवार ने तुरंत संज्ञान लिया और नई एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की। काजी ने भावुक होते हुए कहा कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस एंबुलेंस को दिलाने में उन्होंने हमारी मदद की, आज मुझे उसी एंबुलेंस में उनका पार्थिव शरीर अस्पताल से लेकर जाना पड़ा। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके द्वारा दी गई यह सुविधा उनके लिए ही उपयोग होगी।

अजित पवार की नजीम काजी को वो आखिरी सलाह

नजीम काजी ने उस पल को भी याद किया जब एंबुलेंस की चाबियां सौंपी गई थीं। उन्होंने बताया कि अजित पवार सिर्फ सुविधाएं नहीं देते थे, बल्कि काम के प्रति जवाबदेही भी तय करते थे। उस दिन अजित पवार ने काजी से एक सरल लेकिन प्रभावशाली बात कही थी। उन्होंने कहा था, "अपना काम हमेशा ईमानदारी से करना।" काजी ने बताया कि वे शब्द आज भी उनके कानों में गूंज रहे हैं।

विमान हादसे ने झकझोर दिया महाराष्ट्र

गौरतलब है कि बुधवार सुबह पुणे जिले के बारामती में एक भीषण विमान हादसे में अजित पवार और चार अन्य लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस खबर ने न केवल उनके गृह क्षेत्र बारामती को, बल्कि पूरे महाराष्ट्र को स्तब्ध कर दिया।

राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

अजित पवार का पार्थिव शरीर गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज मैदान में लाया गया। यहां हजारों की संख्या में उनके समर्थक और आम जनता अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। प्रशासन द्वारा उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और माहौल पूरी तरह गमगीन बना रहा।

विकास पुरुष की अमिट छाप

बारामती के विकास में अजित पवार के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। चाहे वह स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा, उन्होंने निजी स्तर पर रुचि लेकर व्यवस्थाओं को सुधारा। नगर परिषद की एंबुलेंस का यह वाकया उनके दूरदर्शी और जन-हितैषी दृष्टिकोण का एक छोटा सा उदाहरण मात्र है। उनके जाने के बाद अब केवल उनकी यादें और उनके द्वारा किए गए विकास कार्य ही शेष हैं।

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