Pune News In Hindi: शहर में पुलिस विभाग के सीसीटीवी प्रोजेक्ट के लिए अंडरग्राउंड केबल बिछाने का काम कुछ समय पहले से चल रहा है जिससे कई प्रमुख सड़कों की हालत खराब हो चुकी है।
इस बीच अब पुणे महानगरपालिका ने आपदा (डिजास्टर) प्रबंधन प्रोजेक्ट के लिए अतिरिक्त 500 किलोमीटर लंबी खुदाई करने की योजना बनाई है। यानी दोनों परियोजनाओं को मिलाकर शहर में कुल 1000 किलोमीटर की खुदाई होने जा रही है। ऐसे में आने वाले कुछ महीने तक पुणेकरों को सड़कों के किनारे हो रही खुदाई से राहत नहीं मिलेगी।
महानगरपालिका शहर के लिए आधुनिक आपदा प्रबंधन सिस्टम विकसित कर रही है। इसके तहत पूरे पुणे शहर का डिजिटल ट्विन (ट्विन मॉडल) बनाया जाएगा। इस परियोजना के तहत नागरिकों को मुफ्त वाई-फाई सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह काम राज्य सरकार के अधीनस्थ "महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर टेक्नॉलॉजी लिमिटेड (महाप्रीत) संस्था को सौंपा गया है जो ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाने का काम करती है। सीसीटीवी और महाप्रीत दोनों परियोजनाओं के लिए करीब 500-500 किलोमीटर खुदाई की जा रही है।
दोबारा खुदाई टालने के लिए पहले दोनों विभागों की बैठक हुई थी, जिसमें करीब 125 किलोमीटर के हिस्से की खुदाई संयुक्त रूप से करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन समन्वय की कमी के कारण महाप्रीत ने पहले ओवरहेड केबल बिछा दीं, जबकि पुलिस विभाग ने स्वतंत्र रूप से अंडरग्राउंड केबल डालीं। अब महाप्रीत को अपनी केबल दोबारा अंडरग्राउंड बिछाने के लिए नई खुदाई करनी पड़ेगी।
महापीत कंपनी ने पुरानी मुंबई-पुणे हाइवे पर केबल बिछाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन वहां खुदाई की अनुमति नहीं मिलने से उन्होंने महानगरपालिका के स्ट्रीट लाइट खंभों के सहारे केवल बिछा दी। महानगरपालिका के विद्युत विभाग ने बताया कि फुटपाथ में पहले से ही डक्ट सिस्टम मौजूद है इसलिए उसी रास्ते से केबल डालनी चाहिए, लेकिन महापरीत ने जवाब दिया कि कुछ महीने बाद यह केबल अंडरग्राउंड की जाएगी इसलिए फिलहाल डक्ट का उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि डक्ट तो सडकी की खुदाई रोकने के लिए ही होती है, फिर भी कुछ अधिकारी इसकी बुनियादी जानकारी क्यों नहीं रखते है?