Farmers Protest Maharashtra: महाराष्ट्र में नागपुर से गोवा को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी 'शक्तिपीठ महामार्ग' (Shaktipeeth Highway) के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। परभणी जिले में इस परियोजना के विरोध में किसानों ने 'एल्गार' पुकारते हुए सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। दो दिन पहले प्रदर्शनकारी किसानों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज ने आग में घी डालने का काम किया है। इसी के विरोध में आज शिंगणापूर फाटा पर सांसद संजय जाधव के नेतृत्व में विशाल 'रास्ता रोको' आंदोलन किया गया, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
सांसद संजय जाधव ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि शक्तिपीठ महामार्ग के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीनें हड़पने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के हितों की बलि देकर विकास का यह मॉडल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों के बढ़ते दबाव और आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल परभणी जिले में जमीन अधिग्रहण के लिए होने वाली मोजणी (सर्वेक्षण) को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।
शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना का विरोध कर रहे किसानों का मुख्य तर्क यह है कि इस मार्ग के निर्माण के कारण मराठवाड़ा के परभणी और नांदेड जैसे जिलों की बेहद उपजाऊ और बागायती जमीनें बर्बाद हो जाएंगी। आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि अगर उनकी खेती ही छीन ली गई, तो किसान अपना गुजारा कैसे करेंगे? सांसद संजय जाधव ने कहा कि जब पहले से ही रत्नागिरी-नागपुर समांतर राष्ट्रीय महामार्ग मौजूद है, तो केवल ठेकेदारों के फायदे के लिए करोड़ों की लागत से एक नया महामार्ग बनाने की क्या आवश्यकता है?
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परभणी में जमीन सर्वेक्षण का विरोध करने वाले किसानों, विशेषकर महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सांसद जाधव बेहद आक्रमक नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्दोष ग्रामीणों को गिरफ्तार कर रही है और उन्हें गांवबंदी की नोटिस थमा रही है, जो लोकतंत्र का अपमान है। दूसरी ओर, जिले की पालकमंत्री मेघना बोर्डीकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर सर्वेक्षण पर रोक लगवाई है। इस पर कटाक्ष करते हुए जाधव ने कहा कि पालकमंत्री केवल श्रेय लेने की राजनीति कर रही हैं, जबकि लाठीचार्ज के समय वे मौन थीं।
आज से ही महाराष्ट्र का बजट सत्र शुरू हुआ है और ऐसे समय में शक्तिपीठ महामार्ग के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि सरकार ने अस्थायी तौर पर मोजणी रोककर आंदोलन को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस परियोजना को पूरी तरह रद्द या मार्ग परिवर्तित नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा।