Chandrashekhar Bawankule (सोर्सः सोशल मीडिया) 
पालघर

पालघर में सूर्या बांध पीड़ितों को मिलेगा 45 साल बाद न्याय, राजस्व मंत्री का सात-बारा देने का ऐलान

Chandrashekhar Bawankule: पालघर के सूर्या बांध विस्थापितों को 45 साल बाद जमीन का मालिकाना हक मिलेगा, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने एक महीने में सात-बारा देने की घोषणा की।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Palghar Surya Dam: पालघर जिले में सूर्या बांध परियोजना के कारण विस्थापित हुए चंद्रनगर और हनुमाननगर के आदिवासियों को 45 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जमीन का मालिकाना हक मिलने जा रहा है। बुधवार को विधानसभा में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर परियोजना से प्रभावित शेष 205 किसानों को सात-बारा उतारा और जमीन के नक्शे उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

विधायक राजेंद्र गावित ने पालघर के सूर्या बांध विस्थापितों का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने बताया कि पालघर जिले में सूर्या डैम परियोजना 1970 से 1982 के बीच पूरी हुई थी, जिसके लिए कुल 11 गांवों का विस्थापन किया गया था। इनमें चंद्रनगर और हनुमाननगर के लोगों का पुनर्वास तो हो गया, लेकिन पिछले 45 वर्षों से कई किसानों को सात-बारा, गांव का नक्शा और अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिला है।

बांधग्रस्त 11 गांवों का हुआ था विस्थापन

उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि सात-बारा उपलब्ध कराए बिना ही वाढवन पोर्ट परियोजना और बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए इस क्षेत्र की जमीनों का अधिग्रहण किया गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रभावित किसानों को अधिकृत कागजात और मुआवजा कब तक मिलेगा।

262 खाताधारकों को मिल चुका है सात-बारा

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि इस प्रकरण में कुल 467 खाताधारक हैं, जिनमें से 262 को पहले ही सात-बारा दिया जा चुका है, जबकि 200 से अधिक किसानों का मामला अभी लंबित है। उन्होंने कहा कि वर्षों से भूमि का स्पष्ट सीमांकन नहीं होने के कारण कई स्थानों पर भू-सीमा में बदलाव हुए हैं।

कुछ किसानों की जमीनें अन्य क्षेत्रों में चली गई हैं और कई जगह अतिक्रमण की समस्या भी सामने आई है। सभी जमीनों का पुनः सीमांकन कर सटीक नक्शे तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

अधिग्रहित जमीनों का मुआवजा

यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष किसानों को एक महीने के भीतर सात-बारा की प्रति और संबंधित नक्शे उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इसके बाद वाढवन पोर्ट और बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीनों का मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तुरंत पूरी की जाएगी। राजस्व मंत्री ने विश्वास जताया कि इस प्रक्रिया से परियोजना प्रभावित किसानों की वर्षों पुरानी लंबित समस्या का समाधान हो जाएगा।

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