Nashik Urea Scam: नासिक विभाग में किसानों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जाने वाले यूरिया-खाद के बड़े पैमाने पर कालाबाजार में जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि इस पूरे रैकेट को स्थानीय राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। खरीफ और रबी सीजन के दौरान नासिक विभाग में करीब 1,120 करोड़ रुपये मूल्य के सब्सिडी वाले यूरिया की कालाबाजारी होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, सरकार किसानों को राहत देने के लिए यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है। नासिक विभाग को प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख 50 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होती है। सरकार एक टन यूरिया पर करीब 40 हजार रुपये की सब्सिडी देती है। इस आधार पर विभाग के लिए कुल सब्सिडी खर्च लगभग 1400 करोड़ रुपये बैठती है। आरोप है कि इसमें से करीब 80 प्रतिशत यूरिया काले बाजार में पहुंच जाता है, जबकि केवल 20 प्रतिशत ही वास्तविक किसानों तक पहुंच पाता है।
कृषि विभाग में चर्चा है कि कम वर्षा और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह गड़बड़ी अधिक हो रही है। ऐसे क्षेत्रों में वास्तविक मांग कम होने के बावजूद बड़ी मात्रा में यूरिया उठाया जाता है। बाद में किसानों के नाम पर कागजों में विक्री दर्शाकर इस स्टॉक को अन्य क्षेत्रों में अधिक कीमत पर बेचा जाता है।
नांदगांव, येवला, सिन्नर और मालेगांव तहसीलों में यह गतिविधि बड़े पैमाने पर होने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक कुछ रैकेट उजागर होने के बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण मामले दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। कृषि सहसंचालक कार्यालय के अंतर्गत आने वाले नासिक विभाग में करीब 8,300 खाद बिक्री केंद्र हैं, जबकि उनकी जांच के लिए केवल 80 निरीक्षक तैनात हैं।
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