मालेगांव सुपारी घोटाले में FDA मंत्री नरहरी जिरवाल और कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने लिया एक्शन।
नासिक के 5 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निलंबित किया।
बिना अनुमति के सुपारी नष्ट करने की झूठी कहानी गढ़ी थी।
Tukaram Mundhe Action in Malegaon Betel Nut Scam: महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचाने वाले बहुचर्चित मालेगांव सुपारी घोटाले में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के मंत्री नरहरि झिरवल और सख्त छवि वाले आयुक्त तुकाराम मुंडे ने विभाग के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने कागजों में हेरफेर करके 252 मीट्रिक टन असुरक्षित और घटिया सुपारी को नष्ट करने का फर्जी पंचनामा तैयार किया था।
मालेगांव सुपारी घोटाले की शुरुआत 11 फरवरी 2024 को शुरू हुई थी। इस दिन FDA की टीम ने नासिक जिले के मालेगांव इलाके में एक बड़ा छापा मारकर 11 ट्रकों में भरी सुपारी का विशाल स्टॉक जब्त किया था। 3605 बाेरों में भरी इस सुपारी की अनुमानित बाजार कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई गई थी।
लैबोरेटरी जांच में यह साबित हुआ था कि यह सुपारी जहरीली/असुरक्षित थी और इंसानों के उपभोग लायक बिल्कुल नहीं थी। इसके बाद, 5 मार्च को अदालत ने इस पूरे स्टॉक को नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने प्रक्रिया पूरी करने के बजाय इसे कागजों में समेट दिया और खराब सुपारी को बाजार में बेचकर मोटी रकम कमाई।
इस मामले की परतें तब खुलीं जब सचिन खैरनार नामक व्यक्ति ने इस संदिग्ध कार्रवाई की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया। जांच समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपोर्ट के अनुसार, 11 ट्रकों का इस्तेमाल करके महज एक ही दिन में 252 मीट्रिक टन सुपारी को नष्ट करना व्यावहारिक और भौतिक रूप से पूरी तरह असंभव है।
समिति ने अपनी जांच में कई सवाल खड़े किए। 11 ट्रकों की कुल माल वहन क्षमता लगभग 44 मीट्रिक टन ही होती है, ऐसे में अधिकारियों ने एक ही दिन में 252 मीट्रिक टन सुपारी नष्ट करने का दावा कैसे किया?
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अलग-अलग अधिकारियों द्वारा बनाए गए सरकारी पंचनामों में एक ही वाहन और एक ही गवाहों के नाम दर्ज थे। यानी कागजी रिकॉर्ड के मुताबिक, वे गवाह और गाड़ियां एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर मौजूद दिखाए गए थे, जो सरासर धोखाधड़ी की ओर इशारा कर रहा था।
जांच समिति ने यह भी पाया कि इतनी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री को नष्ट करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोई जरूरी अनुमति या NOC भी नहीं ली गई थी। इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए विभाग ने नासिक इंटेलिजेंस और स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिराई है।
तुकाराम मुंढे और मंत्री नरहरि झिरवल द्वारा निलंबित किए गए अधिकारियों में ए. आर. दाभाडे (खाद्य सुरक्षा अधिकारी, इंटेलिजेंस, नासिक), ए. यू. रास्कर, जी. वी. कसार, वाई. आर. देशमुख और एस. डी. (अपूर्ण नाम दर्ज) शामिल हैं। इसके अलावा, एक अन्य अधिकारी महाजन (खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नासिक) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं।