त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ की तैयारी पर भूमि विवाद ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नासिक

त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ की तैयारी पर भूमि विवाद, 1100 करोड़ की परियोजना, जमीन अधिग्रहण पर सवाल; किसानों में रोष

Trimbakeshwar Simhastha Mela Kumbh: सिंहस्थ कुंभ के नाम पर भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद गहराया। किसानों ने मुआवजे पर सवाल उठाए, जबकि महंत राममुनी महाराज ने बलपूर्वक जमीन लेने पर चेतावनी दी।

अंकिता पटेल

Nashik Simhastha Land Acquisition Farmers Protest: त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले के आयोजन के नाम पर सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी नदी पर घाटच और सड़कों के निर्माण के लिए 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके लिए किसानों की बेशकीमती जमीन कौड़ियों के दाम पर अधिग्रहित की जा रही हैं।

इस तानाशाही के खिलाफ बड़ा उदासीन अखाड़े के मुकामी महंत राममुनी महाराज ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि बलपूर्वक जमीन छीनी गई, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

किसानों का उत्पीड़न मंजूर नहीं

साधुओं के नाम पर किसानों का उत्पीड़न मंजूर नहीं। इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करते हुए महंत राममुनी महाराज ने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि यह सब साधु-संतों के लिए किया जा रहा है, 5 जबकि असलियत में साधु खुद इस कदम के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, महज 45 दिनों के पर्व काल के लिए सरकार किसानों को हमेशा के लिए विस्थापित करने पर तुली है।

निरर्थक काम के लिए नहीं दी जाएगी जमीन

हम अपनी जमीन किसी निरर्थक काम के लिए नहीं देंगे उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को आगाह करते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे पर खून-खराबा या दंगा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह और कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मामले की शिकायत केंद्र सरकार से करेंगे, क्योंकि हिंदुत्ववादी सरकार होने के बाऊजूद साधु-संतों और किसानों की प्रताडित किया जा रहा है।

तीर्थ स्थलों पर बढ़ानी चाहिए सुविधाएं

सरकार को तीर्थ स्थलों पर सुविधाएं बढ़ानी चाहिए, न कि नए और अर्थहीन निर्माण कार्य करने चाहिए, भ्रष्टाचार और निजी स्वार्थ का आरोप महंत राममुनी महाराज ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे भारी भ्रष्टाचार और निजी स्वार्थ छिपा है। कुछ गिने-चुने स्वार्थी लोगों ने सरकार और अधिकारियों को गुमराह किया है ताकि 1100 करोड़ के ठेकों का लाभ उठाया जा सके।

जमीन की कीमत 25 लाख सरकार दे रही है 25 हजार

यहां जमीन की कीमत 25 लाख रुपये प्रति गुंठा है, फिर भी किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर मात्र 25 हजार रुपये प्रति गुंठा के हिसाब से जमीन हडपना चाहती है।

कुशावर्त ही है प्राचीन स्नान स्थल है। महंत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस स्थान पर 1100 करोड़ के घाट बनाए जा रहे है, वहां गोदावरी नहीं बल्कि शहर का गंदा पानी बहता है। उन्होंने स्पष्ट किया, गोदावरी नदी कुशावर्त में है और चक्रतीर्थ से प्रवाहित हुई है। साधु और श्रद्धालु कुशावर्त में ही स्नान करेंगे क्योंकि वही प्राचीन और श्रद्धा का स्थान है।

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