शिक्षक भर्ती के खिलाफ आदिवासी समुदाय का फूटा गुस्सा। (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
नासिक

Nashik News: शिक्षक भर्ती के खिलाफ आदिवासी समुदाय का फूटा गुस्सा, ‘बिरहाड़ मोर्चा’ की नासिक की ओर कूच

संविदा पर वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को दरकिनार कर नए शिक्षकों की भर्ती किए जाने के निर्णय के विरोध में, शुक्रवार 13 जून से ‘बिरहाड़ मोर्चा’ नामक विशाल आंदोलन की शुरुआत हुई।

आंचल लोखंडे

नासिक: महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदिवासी आश्रम शालाओं में 1791 शिक्षकों की नई भर्ती को लेकर आदिवासी समुदाय में जबरदस्त रोष फैल गया है। संविदा पर वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को दरकिनार कर नए शिक्षकों की भर्ती किए जाने के निर्णय के विरोध में, शुक्रवार 13 जून से ‘बिरहाड़ मोर्चा’ नामक विशाल आंदोलन की शुरुआत हुई।

यह मोर्चा सोग्रस फाटा से रवाना हुआ है और 3 दिनों में नासिक स्थित आदिवासी आयुक्तालय कार्यालय तक पहुंचेगा। इस आंदोलन में राज्यभर के सैकड़ों आदिवासी संगठन, शिक्षक और छात्र भाग ले रहे हैं।

2400 संविदा शिक्षकों की अनदेखी से भड़का आंदोलन

महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग ने 21 मई 2025 को 84 करोड़ 74 लाख रुपये की निविदा को मंजूरी दी है, जिसके तहत 1791 नए शिक्षकों की भर्ती एक बाहरी एजेंसी के माध्यम से की जानी है। परंतु इन पदों पर वर्तमान में लगभग 2400 संविदा शिक्षक 1 से 10 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, जो वर्षों से स्थायी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार के इस निर्णय को संविदा शिक्षकों के भविष्य पर कुठाराघात के रूप में देखा जा रहा है। इससे आक्रोशित होकर आदिवासी संगठनों ने ‘बिरहाड़ मोर्चा’ निकालने का निर्णय लिया है।

मंत्री से मुलाकात बेनतीजा, आंदोलन और तेज

संवेदनशीलता को देखते हुए आदिवासी कर्मचारी संगठनों ने 3 जून को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके से मिलकर विरोध दर्ज कराया था। मगर यह बैठक किसी ठोस आश्वासन के बिना समाप्त हो गई। इसके बाद संगठनों ने सड़क पर उतरकर संघर्ष का रास्ता चुना है। तीन दिवसीय पदयात्रा के बाद, यह मोर्चा सोमवार 16 जून को नासिक में आदिवासी आयुक्तालय कार्यालय के समक्ष विशाल प्रदर्शन के रूप में परिवर्तित होगा।

संविदा शिक्षकों को स्थायी करने की मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार संविदा शिक्षकों को स्थायी करने का निर्णय नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन की रणनीति बनाने में आदिवासी विद्यार्थी संघटन के राज्य अध्यक्ष लकी जाधव, ललित चौधरी, योगिता पवार, पंकज बागूल, पंकज जगताप और अंकुश चव्हाण जैसे नेता प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। संवेदनशील और भविष्य निर्धारण से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार के रवैये को लेकर न केवल शिक्षक, बल्कि छात्र और आदिवासी समाज का बड़ा तबका न्याय और हक के लिए संघर्ष को तैयार है। यदि मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में राज्यव्यापी जनलहर का रूप ले सकता है। बच्चू कडू के आंदोलन में प्रहार कार्यकर्ता ने निगला ज़हर, हालत गंभीर

साथ दे रहे प्रमुख संगठन:

अखिल भारतीय आदिवासी युवा परिषद आदिवासी शिक्षक संघ आदिवासी बचाव अभियान कोकणा-कोकणी समाज संगठन आदिवासी विकास विभाग शासकीय मुख्याध्यापक

आंदोलन में शामिल संघ

रावण युवा फाउंडेशन आदिवासी शक्ति सेना बिरसा ब्रिगेड सत्यशोधक बहुजन आघाड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी महासंघ राघोजी भांगरे क्रांति सेना

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