वॉटर हार्वेस्टिंग (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक में सरकारी इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग फेल, हाईकोर्ट निर्देशों के बावजूद जल संरक्षण में लापरवाही

Nashik Water crisis: नासिक में खुद की इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग न होने पर प्रशासन घिर गया है। याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर दोहरे रवैये पर नाराजगी जताई है।

रूपम सिंह

Nashik Rainwater Harvesting Water crisis: एक ओर नागरिकों को वर्षा जल संग्रहण के पाठ पढ़ाने वाला प्रशासन खुद अपनी सरकारी इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लागू करने में नाकाम साबित हो रहा है। शहर की कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों में आज भी प्रभावी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था मौजूद नहीं होने का गंभीर आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने नासिक

महानगरपालिका आयुक्त को पत्र लिखा है। हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासन केवल बैठकों और कागजी चर्चाओं तक सीमित है, जिस पर रोजश पंडित ने नाराजगी जताई है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में दाखिल PIL/176/2025 जनहित याचिका में शहर में जलसंवर्धन और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के मुद्दे को गंभीरता से उठाया

गया था। इसके बाद विभागीय आयुक्तों की बैठकें, मनपा प्रशासन की समीक्षा बैठकें और विभिन्न विभागों की चर्चाओं में यह मुद्दा बार-बार उठाया गया। लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ है, ऐसा आरोप पत्र में लगाया गया है। राजेश पंडित ने स्वयं विभिन्न सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करने का दावा करते हुए कई चौंकाने वाली बातें पत्र में उजागर की हैं।

आम नागरिकों से पानी संचय की कर रहे अपेक्षा

विभागीय आयुक्त (महसूल) कार्यालय, जल सिंचन भवन, सार्वजनिक बांधकाम विभाग का भवन, रामायण बंगला, महापौर निवास तथा राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण (NHAI) के पलाइओवर परिसर में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था अधूरी या निष्क्रिय होने की बात सामने आई है। करोड़ों रुपये की सरकारी इमारतों में ही बारिश का पानी बर्बाद हो रहा है, जबकि आम नागरिकों से नियमों के पालन की अपेक्षा की जा रही है।

इसे प्रशासन का दोहरा रवैया बताया गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्ष छह महीने तक अच्छी बारिश होने के बावजूद इस वर्ष मार्च महीने से शहर के कई इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई करनी पड़ रही है। बारिश होती है, पानी बहकर चला जाता है और गर्मियों में नागरिकों को टैंकरों के लिए भटकना पड़ता है, इसका जिम्मेदार कौन? ऐसा सीधा सवाल प्रशासन से पूछा गया है।

जल प्रबंधन की अनदेखी

मानसून आने में अब केवल कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन कई सरकारी इमारतों में अब तक रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के काम अधूरे पड़े हैं। इससे भविष्य में जल संकट और गंभीर होने की आशंका जताई गई है। खासकर आगामी कुंभमेले की पृष्ठभूमि पर लाखों श्रद्धालुओं के नासिक आने वाले हैं। ऐसे समय शहर के जल प्रबंधन की अनदेखी खतरनाक साबित हो सकती है, ऐसा भी पत्र में कहा गया है।

याचिकाकर्ता ने मनपा आयुक्त से सभी विभाग प्रमुखों को तत्काल नोटिस जारी कर उनके अधीन आने वाली सभी सरकारी और प्रशासनिक इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही काम पूरा नहीं करने वाले विभागों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।

जब प्रशासनिक इमारतों में ही नियमों का पालन नहीं हो रहा, तब नागरिकों को पर्यावरण सरक्षण और जलसंवर्धन का पाठ पढ़ाने का नैतिक अधिकार प्रशासन खो चुका है। ऐसा तीखा हमला करते हुए इस मामले में तुरंत कठोर कदम उठाने की मांग की गई है।

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