Nashik Water Project Inauguration: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नासिक मनपा के 274 एमएलडी विल्होली जल उपचार संयंत्र (WTP) और मुकाने जल आपूर्ति योजना के विस्तार का उद्घाटन किया। 370 करोड़ रुपये की यह टर्नकी परियोजना 2055 तक 55 लाख से अधिक निवासियों को विश्वसनीय जल आपूर्ति प्रदान करेगी और आगामी 2027 कुंभ मेले के लिए भी तैयारी सुनिश्चित करेगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह जल अवसंरचना परियोजना राज्य की सतत विकास और सुदृढ़ शहरी प्रणालियों के प्रति प्रतिबद्धता में एक मील का पत्थर है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना नासिक में जल सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और स्थानीय आजीविका को मजबूत करके भारत के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और विकसित भारत 2047 के विजन का समर्थन करती है।
यह योजना जन कल्याण, स्वास्थ्य और सामुदायिक कल्याण के प्रति नासिक मनपा की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह परियोजना न केवल नासिक के शहरी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करती है, बल्कि तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और निवासियों, सभी के लिए पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करती है, जिससे स्थानीय रोज़गार और पर्यटन व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलता है।
यह परियोजना 2027 के कुंभ मेले से पहले पूरी होने वाली है। इसके माध्यम से नासिक बड़े पैमाने पर होने वाले जनसभाओं की मेजबानी करने की अपनी क्षमता को बनाए रखेगा। इस योजना से नागरिकों के लिए जल सुरक्षा और समानता में सुधार आएगा।
वित्तीय आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, नासिक मनपा द्वारा परियोजना के आंशिक वित्तपोषण के लिए लगभग 200 करोड़ मूल्य के ग्रीन सस्टेनेबल बॉन्ड जारी किए गए हैं।
नासिक मनपा की आयुक्त एवं प्रशासक मनीषा खत्री ने बताया कि नासिक नगर निगम गैर-राजस्व जल (एनआरडब्ल्यू) में उल्लेखनीय कमी लाकर नासिक को वैश्विक मानक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। एनआरडब्ल्यू को वर्तमान 45% से घटाकर 27% करने का लक्ष्य है, जिसका अंतिम लक्ष्य 5% निर्धारित किया गया है।
परियोजना में प्रमुख पहलों के तहत 15.7 किलोमीटर लंबी माइल्ड-स्टील शुद्ध जल ग्रेविटी मेन और 7.9 किलोमीटर लंबी डक्टाइल-आयरन मेन की स्थापना की गई है। इसमें गंगापुर बांध और मुकाने बांध परियोजनाएं शामिल हैं।
इसमें जल लचीलापन बढ़ाने के लिए नवीनतम तकनीक और एससीएडीए स्वचालन (SCADA automation) का उपयोग किया गया है। ये प्रयास सभी मौसमों में पीने योग्य पानी की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं और जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौतियों का समाधान करते हैं।