Nashik Rural Drinking Water Shortage ( Source: Social Media ) 
नासिक

नासिक: बेमौसम बारिश से फसलें प्रभावित, ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा; 24 गांवों में टैंकर से पानी सप्लाई

Nashik Water Crisis: नासिक जिले में बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है, वहीं 24 क्षेत्रों में जल संकट के चलते टैंकर से पानी आपूर्ति की जा रही है, जिससे 7830 लोग प्रभावित हैं।

अंकिता पटेल

Nashik Rural Drinking Water Shortage: नासिक एक ओर बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नासिक जिले के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की किल्लत गंभीर होती जा रही है। कुएं, बोरवेल और छोटे जल स्रोत सूखने के कारण नागरिकों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

विडंबना यह है कि 'बांधों की तहसील' कहे जाने वाले इगतपुरी में ही 9 स्थानों पर टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने प्रभावित 24 क्षेत्रों में 5 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू कर दी है, जिससे लगभग 7830 की आबादी लाभान्वित हो रही है।

इगतपुरीः बांधों के बीच 'सूखा' और कड़वी सच्चाई इगतपुरी तहसील में भातसा, वैतरणा, मुकणे और तलवाडे जैसे महत्वपूर्ण बांध होने के बावजूद स्थानीय जनता प्यासी है।

टैंकर की स्थितिः तहसील के 2 गांवों और 7 वाड़ियों में टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों की शिकायत है कि इन बांधों का पानी मुख्य रूप से मुंबई और ठाणे जैसे महानगरों के लिए आरक्षित है। खुद के बांध होने के बावजूद इगतपुरी में हर वर्ष गर्मियों में जलसंकट पैदा होना एक नियति बन गई है।

सिन्नर और देवला में भी जल संकट की आहट सिर्फ इगतपुरी ही नहीं, जिले के अन्य हिस्सों में भी जलस्तर तेजी से घट रहा है-

सिन्नर तहसीलः औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध सिन्नर की 14 बस्तियों (वाड़ियों) को टैंकर से पानी दिया जा रहा है।

देवला तहसीलः देवला के 1 गांव में टैंकर द्वारा जलापूर्ति शुरू की गई है। अप्रैल की शुरुआत में ही 24 स्थानों पर टैंकर लग चुके हैं। मई की भीषण गर्मी में यह संख्या बढ़ने की प्रबल आशंका है।

बांधों की स्थितिः भंडार बेहतर, पर गंगापुर में गिरावट

तापमान में वृद्धि के कारण बांधों में जल का बाष्पीकरण तेजी से हो रहा है। जिले के बांधों की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है- वर्तमान में 48.94 प्रतिशत स्टॉक है (पिछले वर्ष इसी समय 39.36 प्रतिशत था), नासिक शहर की जीवनरेखा गंगापुर बाध में फिलहाल 60.78 प्रतिशत स्टॉक है।

पिछले वर्ष यह 65.63 प्रतिशत था)। वर्तमान में जिले के कुल 24 प्रभावित स्थानों की 7830 जनसंख्या पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर है। प्रशासन के अनुसार, प्राकृतिक जल सोतों के सूखने के कारण टैंकर ही एकमात्र विकल्प बचा है, यदि जल संकट की यही स्थिति बनी रही, तो ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी जलापूर्ति पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

हमारे बांधों से बड़े शहरों की प्यास 66 बुझती है, लेकिन हमारे अपने कुछ सूख चुके है। हर साल अप्रैल आते ही हमें टैंकर का इंतजार करना पड़ता है।

- अस्त ग्रामीण, इगतपुरी

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