नासिक त्र्यंबकेश्वर  सोर्स: सोशल मीडिया
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नासिक जिले में सिंहस्थ कुंभ के नाम पर मकानों और दुकानों को न उजाड़ें, त्र्यंबकेश्वर के नागरिकों की मांग

Nashik Trimbakeshwar Residents Appeal: नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों में 200 साल पुरानी दुकानों और मकानों को संरक्षण देने की मांग हैं।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • सिंहस्थ कुंभ मेले के विकास कार्यों से त्र्यंबकेश्वर के दुकानदारों और रहिवासियों में विस्थापन की आशंका।

  • कुशावर्त तीर्थ और तीर्थ मार्ग के आसपास की पुरानी दुकानों व मकानों को बचाने की मांग।

  • नागरिकों ने कुंभ मेला मंत्री और पालकमंत्री को ज्ञापन सौंपा।

  • स्थानीय लोगों ने कहा कि पारंपरिक व्यवसायों से कई परिवारों की आजीविका पीढ़ियों से जुड़ी है।

  • नागरिकों ने विकास कार्यों से पहले प्रभावित दुकानदारों और मकान मालिकों से चर्चा करने की अपील की।

Nashik Trimbakeshwar Simhastha Shopkeepers Displacement: त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत प्रस्तावित सड़क विस्तार और विकास कार्यों को लेकर स्थानीय दुकानदारों तथा रहिवासियों में चिंता बढ़ रही है। नागरिकों को आशंका है कि कुशावर्त तीर्थ और तीर्थ मार्ग के आसपास स्थित पुरानी दुकानें, मकान और वाड़े प्रभावित हो सकते हैं। इस संबंध में कुंभ मेला मंत्री और पालकमंत्री को ज्ञापन देकर पारंपरिक व्यवसायियों तथा स्थानीय परिवारों को विस्थापित नहीं करने की मांग की गई है। नागरिकों ने विकास और ऐतिहासिक बसावट के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की अपील की है।

सिंहस्थ के नाम पर मकानों और दुकानों को न उजाड़ें

त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर त्र्यंबकेश्वर के स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों में अपने घरों तथा व्यवसायों को लेकर चिंता बढ़ रही है। क्षेत्र की संकरी सड़कों के विस्तार और अन्य विकास कार्यों के कारण कुछ मकानों और दुकानों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

त्र्यंबकेश्वर के नागरिकों की मांग

इस पृष्ठभूमि में नागरिकों ने कुंभ मेला मंत्री और पालकमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पारंपरिक दुकानदारों तथा रहिवासियों को विस्थापित नहीं करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए यातायात व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का विकास आवश्यक है, लेकिन इन योजनाओं को तैयार करते समय स्थानीय लोगों की आजीविका, ऐतिहासिक बसावट और सांस्कृतिक विरासत का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

200 से 250 साल पुरानी दुकानों को संरक्षण देने की मांग

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कुशावर्त क्षेत्र के आसपास और तीर्थस्थल के सामने के क्षेत्र में लगभग 200 से 250 वर्षों से पारंपरिक दुकानें संचालित हो रही हैं। कई परिवार पीढ़ियों से धार्मिक सेवाओं और तीर्थयात्रियों की जरूरतों से जुड़े व्यवसाय कर रहे हैं।

इन दुकानों से होने वाली आय पर संबंधित परिवारों की आजीविका निर्भर है। ऐसे में दुकानों को हटाने या व्यवसाय का स्थान बदलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। नागरिकों ने मांग की है कि विकास कार्यों के दौरान इन पारंपरिक दुकानों को हटाने के बजाय उनके संरक्षण के विकल्प तलाशे जाएं।

पीढ़ियों से धार्मिक सेवाओं से जुड़े हैं स्थानीय व्यवसायी

त्र्यंबकेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों में शामिल है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की जरूरतों को पूरा करने में स्थानीय दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई परिवार लंबे समय से इसी क्षेत्र में रह रहे हैं और उनकी आजीविका धार्मिक गतिविधियों तथा तीर्थयात्रियों की आवाजाही से जुड़ी हुई है। दुकानों और व्यवसायों के स्थानांतरण से रोजगार के साथ-साथ परिवारों की आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले प्रभावित दुकानदारों और मकान मालिकों से चर्चा की जाए तथा उनकी समस्याओं को समझकर समाधान निकाला जाए।

पुराने वाड़े और पारंपरिक बस्तियां त्र्यंबकेश्वर की पहचान

नागरिकों ने कुशावर्त क्षेत्र के साथ-साथ तीर्थस्थल की ओर जाने वाले मार्ग और आसपास के निचले हिस्सों में स्थित पुराने मकानों तथा वाड़ों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, ये पारंपरिक बस्तियां त्र्यंबकेश्वर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।

इन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों का सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव भी लंबे समय से इसी स्थान से बना हुआ है। नागरिकों का कहना है कि विकास योजनाओं में इन पुरानी संरचनाओं और स्थानीय निवासियों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

कुंभ मेला मंत्री और पालकमंत्री को सौंपा ज्ञापन

तीर्थराज कुशावर्त क्षेत्र के नागरिकों और दुकानदारों ने कुंभ मेला मंत्री तथा पालकमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पारंपरिक व्यवसायियों और मकान मालिकों को उनके स्थानों से नहीं हटाने की मांग की है। ज्ञापन के माध्यम से संबंधित मंत्रियों से हस्तक्षेप करने और प्रशासन तक स्थानीय लोगों की मांग पहुंचाने की अपील की गई है। नागरिकों ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के दौरान विकास कार्यों की योजना बनाते समय स्थानीय जरूरतों, पारंपरिक व्यवसायों और पुराने आवासीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की अपील

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए आवश्यक विकास कार्यों और रहिवासियों के हितों के बीच संतुलन बनाकर रास्ता निकाला जाए। उनका कहना है कि यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ प्रभावित होने की आशंका वाले मकानों, दुकानों और पुराने वाड़ों के संरक्षण के विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

नागरिकों की अपेक्षा है कि प्रशासन कोई भी निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों से संवाद करे, ताकि कुंभ मेले की तैयारियों के साथ उनकी रोजी-रोटी और वर्षों पुरानी बसावट भी सुरक्षित रह सके।

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