मंत्री गिरीश महाजन, विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शेखर सिंह व अन्य (सोर्स: IANS)
नासिक

नासिक सिंहस्थ कुंभ की बैठक में संतों के बीच विवाद, त्र्यंबक राजा के मुकुट के डेमो पर हुआ हंगामा

Nashik Trimbakeshwar Simhastha Kumbh में धर्म ध्वजारोहण समारोह की तैयारी के लिए बैठक में त्र्यंबक राजा के मुकुट के डेमो को लेकर विवाद हुआ। संतों ने बैठकों को अलग-अलग आयोजित करने की मांग रखी।

आलोक उमाकृष्ण

Review Meeting Dispute Over Crown Demo: 31 अक्टूबर 2026 को नासिक त्रंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के लिए आयोजित होने वाले धर्म ध्वजारोहण समारोह की तैयारी की समीक्षा के लिए पालक मंत्री गिरीश महाजन के साथ मिला विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शेखर सिंह की मौजूदगी में आयोजित बैठक के दौरान जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक हरि गिरि महाराज का हंगामा इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है।

हंगामा जिस त्र्यंबक राजा के मुकुट के प्रतीक के प्रदर्शन को लेकर खड़ा किया गया उसका वहां पर कोई औचित्य नहीं था ऐसा हम नहीं त्रंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे का मानना है।

उनका साफ-साफ शब्दों में आरोप है कि धर्म ध्वजारोहण समारोह में सनातन धर्म के सबसे बड़े गुरु शंकराचार्य की मौजूदगी में किया जाना है जिससे कुछ अखाड़े के मठाधीश अपने आप को महत्वहीन मान रहे हैं और यही कारण है कि वह हंगामा खड़ा करके अपने वर्चस्व को बढ़ाना चाहते हैं।

भक्ति चरण दास जी महाराज के अनुसार

वही इस संबंध में वैष्णो तीनो हनी अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्ति चरण दास जी महाराज का कहना है कि जब सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि नासिक और त्रंबकेश्वर में एक साथ एक ही समय पर धर्म ध्वजा का रोहण होगा ऐसे में हरी गिरी महाराज का यह बेतुका मांग है कि समय में 10-20 मिनट का अंतर रखा जाए जहां पर दोनों जगह सभी अखाड़े शामिल हो सके।

वहीं कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि अखाड़ा परिषद में दो भाग हो जाने के कारण कुंभ मेले में हरी गिरी महाराज की भूमिका लगभग महत्वहीन हो चुकी है और वह अपना वर्चस्व दिखाने के लिए हंगामा खड़ा कर दिया।

फिलहाल मामला चाहे जो हो लेकिन यह तय है कि हरि गिरि महाराज नासिक और त्रंबकेश्वर में अपना वर्चस्व जमाने के लिए त्र्यंबक राजा के मुकुट के प्रतीक को बहाना बना लिया और समीक्षा बैठक में एक ऐसा हंगामा खड़ा कर दिया जो अब देश भर में साधु संत समाज के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

सुधार और सुझाव की जरूरत

सिंहस्थ कुंभ की समीक्षा बैठक के दौरान जिस त्र्यंबक राजा के मुकुट के प्रतीक को लेकर हंगामा खड़ा किया गया उस विषय में प्राप्त जानकारी के अनुसार वह मुकुट डेमो के रूप में समीक्षा बैठक में रखा गया था और उसे इसीलिए वहां पर लाया गया था कि उसे देखकर उसे पर वहां पर मौजूद लोग अपना सुझाव रखें कि इस मुकुट में और क्या सुधार किया जा सकता है।

लेकिन जब मकसद हो बहाना खोज कर हंगामा खड़ा करना तब उद्देश्य अपने आप शून्य हो जाते हैं और हुआ भी वही शासन प्रशासन के सामने हंगामा खड़ा करके हरि गिरि महाराज ने अपना उद्देश्य तो पूरा कर लिया लेकिन इस दौरान उन्होंने त्रंबकेश्वर पुरहित संघ के अध्यक्ष को जिस तरह से टारगेट बनाकर टिप्पणी की उसकी अब चारों तरफ से निंदा हो रही है।

अलग-अलग हो त्रंबकेश्वर नासिक के अखाड़े की बैठक

वैष्णो संप्रदाय के तीनों अनी अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज का कहना है कि नासिक और त्रंबकेश्वर में समीक्षा बैठक हो या अखाड़े को लेकर प्रशासन की तैयारी की बैठक अलग-अलग होनी चाहिए जिससे यह स्थिति दोबारा ना बने क्योंकि कुछ लोगों का मकसद ही हंगामा खड़ा करके अपना वर्चस्व बढ़ाना है।

यही नहीं राष्ट्रीय प्रवक्ता ने प्रयागराज महाकुंभ के मेला विकास प्राधिकरण की उसे बैठक का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह से वहां की बैठक में एक वैष्णव अखाड़े के महंत को सरेआम पीटा गया था उसकी पुनरावृत्ति नासिक शहर में ना हो इसके लिए प्रशासन को सजग रहने की जरूरत है।

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