आदिवासी युवाओं का प्रदर्शन (सोर्सः सोशल मीडिया)
नासिक

नासिक में आदिवासी युवाओं का प्रदर्शन, मंत्री के इस्तीफे की मांग, सरकार को दी दो दिन की मोहलत

Nashik Tribal Youth Protest: नासिक में आदिवासी जेन-जी ने 14 अगस्त के शासन निर्णय को रद्द करने और आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आयुक्तालय के बाहर प्रदर्शन किया।

आंचल लोखंडे

Tribal Development Commissionerate Nashik: आदिवासी विकास विभाग द्वारा शासकीय आश्रमशालाओं के संदर्भ में 14 अगस्त को जारी शासन निर्णय को तुरंत रद्द करने, सर्पदंश से जान गंवाने वाली छात्राओं के परिजनों को मुआवजा देने तथा आदिवासी विकास मंत्री, सचिव और आयुक्त के इस्तीफे की मुख्य मांगों को लेकर 'आदिवासी जेन-जी' ने मंगलवार 18 अगस्त को आदिवासी आयुक्तालय के समक्ष दिनभर धरना दिया। इस दौरान प्रवेश द्वार पर ही अधिकारियों के सामने शासन निर्णय की प्रति फाड़कर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया गया।

आदिवासी विकास विभाग के विभिन्न संगठनों का शहर के इदगाह मैदान पर पिछले पांच दिनों से अनशन जारी था। प्रशासन द्वारा इसकी कोई सुध न लिए जाने से नाराज युवाओं ने मंगलवार सुबह 11:30 बजे अपना मोर्चा आयुक्तालय की ओर मोड़ दिया। प्रवेश द्वार पर धरना देते हुए प्रदर्शनकारियों ने आयुक्तालय के भीतर घुसने का प्रयास किया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस उपायुक्त मोनिका राउत के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

युवाओं ने फाड़ी GR की प्रति

आंदोलन की उग्रता को देखते हुए आयुक्तालय के करीब आधा दर्जन अधिकारी चर्चा के लिए सीधे मुख्य द्वार पर पहुंचे। आंदोलनकारियों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखीं और 14 अगस्त के शासन निर्णय को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। लिखित आश्वासन न मिलने तक पीछे न हटने के रुख के कारण अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता विफल हो गई। इसके बाद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने प्रवेश द्वार पर ही जीआर की प्रति फाड़ दी, जिसके बाद अधिकारी वहां से लौट गए।

शाम 5 बजे प्रदर्शनकारियों ने आपस में चर्चा कर सरकार को दो दिन की मोहलत दी और अपना धरना आंदोलन पुनः इदगाह मैदान पर जारी रखने का निर्णय लिया। इस प्रदर्शन में प्रशांत गावंडे, सचिन पावरा, सागर पावरा, तुलसीराम खोटरे, सोनू गायकवाड़, अमोल राजेगवारी और वैभव गांगुर्डे सहित बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।

ये हैं मुख्य मांगें:

  • आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके अपने पद से इस्तीफा दें।

  • पिछले दो वर्षों में आदिवासी आश्रमशालाओं में हुई 584 मौतों की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

  • गढ़चिरौली आश्रमशाला में मृत 3 विद्यार्थियों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

  • छात्रवृत्ति धारक आदिवासी विद्यार्थियों से अवैध फीस वसूलने वाले कॉलेजों की मान्यता रद्द कर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं।

  • राज्य की सभी 'सेंट्रल किचन' व्यवस्थाओं को बंद कर पूर्व की भांति आश्रमशालाओं में ही भोजन पकाने की व्यवस्था बहाल की जाए।

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