Ulgulan Morcha Mumbai March Police: आदिवासी छात्रों के लंबित मुद्दों और आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे की मांग को लेकर सकल आदिवासी समाज द्वारा नासिक से मुंबई (राजभवन) के लिए निकला 'उलगुलान' मोर्चा सोमवार को पुलिस की घेराबंदी तोड़कर मुंबई की ओर रवाना हो गया।
ईदगाह मैदान पर पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी, लेकिन उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल को धता बताते हुए अवरोधकों को हटा दिया और आगे बढ़ गए। अनुमति न होने का हवाला देकर पुलिस द्वारा मोर्चा रोकने के प्रयास के दौरान तीखी झड़प हुई।
माहौल तनावपूर्ण होते ही पुलिस ने मोर्चा प्रमुख सोनू गायकवाड़, जयेश ठाकरे, विवेक गावित, विकी मुंजे और जीवन भोये सहित लगभग 15 प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।
उल्लेखनीय है कि आश्रमशालाओं की बदहाली, घटिया सुविधाओं और छात्रों की मौतों के विरोध में पिछले 42 दिनों से ईदगाह मैदान पर धरना प्रदर्शन चल रहा था। शासन की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय न होने पर आंदोलकों ने सीधे मुंबई जाकर मुख्यमंत्री से मिलने का फैसला किया।
मोर्चा शुरू होने से पहले निवासी उपजिलाधिकारी रोहितकुमार राजपूत और पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आगामी नासिक दौरे के दौरान आदिवासी छात्रों की समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर बैठक कराई जाएगी।
प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों को उनकी समस्याएं सरकार के सामने रखने का अवसर देने का आश्वासन भी दिया गया। अधिकारियों ने इसी आधार पर ‘उलगुलान’ मोर्चा स्थगित करने का अनुरोध किया। हालांकि, आंदोलनकारियों ने तत्काल समाधान के बजाय केवल आश्वासन मिलने की बात कहते हुए प्रशासन के प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई और मुंबई कूच जारी रखने का निर्णय लिया।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन की ओर से दिए गए बैठक के आश्वासन को पर्याप्त नहीं मानते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया। उनका कहना था कि पिछले कई दिनों से उनकी मांगों को लेकर आंदोलन जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। नेताओं की हिरासत के बावजूद आंदोलनकारियों ने संघर्ष जारी रखने की बात कही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी छात्रों के लंबित मुद्दों और अन्य मांगों के समाधान के लिए शुरू किया गया आंदोलन किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका मोर्चा हर हाल में मुंबई पहुंचेगा और वहां अपनी मांगें सरकार के सामने रखी जाएंगी।