Nashik SIT Investigation: नासिक स्थित टीसीएस कंपनी में महिलाओं के यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण का मामला दिन-ब-दिन और अधिक गंभीर होता जा रहा है। इस मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल के हाथ बेहद चौंकाने वाले सुराग लगे हैं, जिनसे यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने पीड़ित महिलाओं को जाल में फंसाने के लिए अमानवीय हथकंडे अपनाए थे।
जांच के अनुसार, संदिग्ध आरोपियों ने पीड़ित महिलाओं को विश्वास में लेकर उन्हें शिरखुरमा और ठंडे पेयों में नशीले पदार्थ मिलाकर दिए थे। जब महिलाएं इन पदार्थों के प्रभाव में बेहोशी की हालत में होती थीं, तब उनके साथ यौन अत्याचार किए गए। इतना ही नहीं, महिलाओं का ब्रेनवॉश कर उनका धर्मांतरण कराने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास किए जा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले के पीछे केवल आपराधिक मंशा नहीं, बल्कि एक बड़ी धार्मिक साजिश है। आरोपियों के बैंक स्टेटमेंट और केवाईसी दस्तावेजों की जांच करने पर SIT को युवतियों के धर्मांतरण के लिए हुई संदिग्ध फंडिंग के प्रमाण मिले हैं। पुलिस अब इस फंडिंग के मुख्य स्रोत और इस रैकेट की गहराई का पता लगाने में जुटी है। मामले की मुख्य संदिग्ध आरोपी निदा एजाज खान की अग्रिम जमानत याचिका को नासिकरोड स्थित अतिरिक्त जिला न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
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विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर के प्रभावी तर्कों और SIT द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर न्यायालय ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया। निदा फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। शनिवार 2 मई को मामले के 4 अन्य संदिग्धों-तौसीफ अत्तार, दानिश शेख, एजाज शेख और रजा मेमन को अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी पुलिस हिरासत 4 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। वहीं, आसिफ अंसारी, शफी शेख और कंपनी की असिस्टेंट जनरल मैनेजर अश्विनी चैनानी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। नासिक पुलिस आयुक्तालय का विशेष दल इस मामले की गहन जांच कर रहा है, जिसमें आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।