Nashik Inflation: पिछले एक सप्ताह के भीतर चीनी के दामों में 20 से 25 रुपये प्रति किलो की भारी वृद्धि के कारण आम जनता का घरेलू बजट पूरी तरह से डगमगा गया है। चीनी की इस मूल्यवृद्धि का सीधा असर सड़क किनारे की टपरियों पर मिलने वाली चाय पर पड़ा है। पहले 10 रुपये में मिलने वाली चाय अब 15 रुपये हो गई है, जबकि 10 रुपये में मिलने वाली 'कट चाय' भी आम आदमी की पहुंच से बाहर महसूस होने लगी है।
दामों में हुई इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और श्रमिक वर्ग पर पड़ रहा है। टपरी पर चाय पीने वाले मजदूर और सफाई कर्मचारी सरकार की नीतियों के कारण अब एक कप चाय के लिए भी तरसते नजर आ रहे हैं।
चीनी के भाव बढ़ने से घरों में बनने वाले मीठे पकवान महंगे हो गए हैं। सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि पिछले एक महीने के भीतर दालें, खाद्य तेल और चावल जैसे दैनिक किराना सामानों की कीमतों में भी लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है। इसके चलते दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों से लेकर मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट पर गहरा आर्थिक असर पड़ रहा है।
बीते 6 महीनों के भीतर टपरियों पर चाय की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इससे पहले खाड़ी देशों में शुरू हुए संघर्ष के कारण गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा आई थी, जिससे कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ने पर विक्रेताओं ने चाय के दाम में 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी। अब चीनी की कीमतों में हुए इजाफे के कारण औसतन 3 रुपये प्रति कप की दर बढ़ा दी गई है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले छह महीनों में 7 रुपये में मिलने वाली चाय अब 15 रुपये पर पहुंच गई है।
होटल संचालक सतीश दोमाडे ने कहा कि दिन-प्रतिदिन बढ़ती महंगाई के कारण आम नागरिकों के सामने जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां आय स्थिर है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी जरूरतों पर होने वाला खर्च दोगुना हो रहा है। नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक दलों को आपसी आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए। जनता ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर राहत देने की मांग की है।