Nashik Smart City: नासिक शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत प्रशासनिक लापरवाही के कारण आम जनता की मुश्किलें चरम पर पहुंच गई हैं। शहर की लगभग 80 प्रतिशत सड़कों को प्रशासन ने जगह-जगह से खोदकर छोड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य ठेकेदारों ने इन कामों को उप-ठेकेदारों को सौंप दिया था, लेकिन भुगतान न मिलने के कारण उप-ठेकेदारों ने पिछले 8 दिनों से काम पूरी तरह बंद कर दिया था।
हालांकि, अब काम दोबारा शुरू तो कर दिया गया है, लेकिन बहुत ही कम कर्मचारी होने के कारण काम की गति अत्यंत धीमी है। वर्तमान में मानसून का समय होने के कारण यदि भारी बारिश होती है, तो शहर की स्थिति और अधिक भयावह होने की आशंका है। सड़कों की इस बदहाली की वजह से सातपुर सहित कई इलाकों में पहले ही गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है।
जगह-जगह हुई इस खुदाई के कारण पूरे शहर में धूल का साम्राज्य स्थापित हो गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों में श्वसन और सांस से संबंधित बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अलावा, सड़कों और दुकानों के ठीक बाहर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगे होने के कारण स्थानीय व्यापारियों का व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया है। दुकानदारों के लिए दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन और अन्य दैनिक खर्च निकालना बेहद मुश्किल हो गया है।
ये भी पढ़े: भंडारा: जुनोना ग्राम पंचायत के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू, अतिक्रमण और फंड घोटाले की जांच की मांग
आरोप है कि प्रशासन स्थानीय मराठी व्यापारियों और मतदाताओं की इस दयनीय स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है। प्रशासन के इसी ढुलमुल रवैये के खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने कड़ा रुख अपनाया है। मनसे कार्यकर्ता मनोज घोडके, मिलिंद कांबळे, सत्यम खंडाळे और अमित गांगुर्डे सहित अन्य सहयोगियों ने सीधे आधे-अधूरे विकास कार्यों वाले खोदे गए गड्ढों में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने हाथों में निषेध के बैनर-पोस्टर लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया।