प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नासिक

महाकुंभ की तैयारी: सिंहस्थ से पहले नासिक पहुंचे साधु, पंचवटी बनी पहली पसंद

Nashik Kumbh: अक्टूबर में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए देशभर से साधु- संन्यासी नासिक पहुंचने लगे हैं और पंचवटी क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।

अंकिता पटेल

Nashik Simhastha Mela: नासिक अक्टूबर में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले में देश के अलग-अलग राज्यों से साधु और संन्यासी नासिक पहुंचने लगे हैं। यह साधु अभी नासिक शहर और उसके आस-पास का मुआयना कर रहे हैं ताकि साल भर रहने के लिए सही जगह ढूंढ सकें, और पंचवटी इलाके को खास तौर पर ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।

पंचवटी, तपोवन इलाके, पुराने नासिक और संडे फाउंटेन इलाके में रहने के लिए सही, शांत और आध्यात्मिक रूप से अच्छी जगहों की तलाश जारी है, और दूसरे राज्यों से आने वाले साधुओं का आना यहां बढ़ने लगा है।

चूंकि उन्हें साल भर रहना है, इसलिए रहने के लिए पवित्रता, शांति और आध्यात्मिक माहौल वाला इलाका जरूरी होता जा रहा है। सनातन परंपरा का प्रतीक है महाकुंभत्र्यंबकेश्वर-नासिक इलाके में होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला सिर्फ एक धार्मिक समारोह नहीं है, बल्कि इसे भारतीय आध्यात्मिकता, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक संस्कृति का एक बड़ा उत्सव माना जाता है। इस कुंभ मेले के लिए दुनिया भर से लाखों भक्त नासिक आते हैं। इसी तरह, देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु, संत, महंत, महामंडलेश्वर, आचार्य और तपस्वी यहां आते हैं और एक साल तक यहीं रहते हैं।

साथ ज्ञान, भक्ति और योग का त्योहार

66 पंचवटी, तपोवन इलाका, पुराना नासिक और गोदावरी के पास के इलाके, जो भगवान श्री राम के स्पर्श से पवित्र हुए हैं, साधुओं और तपस्वियों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं, गोदावरी के किनारे ध्यान करने का मौका देते हैं, इसलिए साधु कहते हैं कि इन इलाकों का बहुत आध्यात्मिक महत्व है।

कुंभ मेला सिर्फ स्नान, जुलूस या धार्मिक रस्मे नहीं है बल्कि यह आत्म-शुद्धि, वैराग्य के साथ-साथ ज्ञान, भवित और योग का त्योहार है, इस कुंभ मेले में अलग-अलग पंथों के साधु, नागा साधु, वैष्णव, शैध, दशनामी पंथ, उदल, नाथ और वारकरी परंपरा के साधक एक साथ आते हैं। इस वजह से नासिक पूरे साल आध्यात्मिकता का केंद्र बन जाता है।

साधु और महंत को कुंभमेले का इंतजार

कुंभ मेले का समय साधुओं और महतों के लिए बहुत अहम माना जाता है। योग, तपस्या, जप, यज्ञ, पूजा भक्तों को दर्शन देना और उन्हें सही आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना ही उनकी सेवा है, कई साधु कुंभ मेले का इंतजार कर रहे है, क्योंकि इस दौरान साधकी और भक्तों का एक बड़ा संगम होता है और साधना की महिमा आम लोगों तक पहुँचती है। क्योंकि इस साल अक्टूबर में झंडा फहराया जाएगा, इसलिए कुंभ मेले की तैयारियों में और तेजी आ गई है।

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