Nashik ST Bus Accident: पुराने नासिक के सारडा सर्कल क्षेत्र में सड़क के बीच खोदे गए गड्ढे में एसटी बस के चालक की ओर के दोनों पहिए धंस जाने से बड़ी दुर्घटना टल गई। नंदुरबार से नासिक आ रही महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल की बस क्रमांक एमएच 14-एलएक्स 6574 नॅशनल उर्दू हाईस्कूल परिसर के मुख्य मार्ग से गुजर रही थी। इसी दौरान अचानक बस के पहिए सड़क में खोदे गए गड्ढे में जा धंसे।
चालक ने समय रहते प्रसंगावधान बरतते हुए बस पर नियंत्रण पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। गनीमत रही कि घटना में कोई यात्री घायल नहीं हुआ। सारडा सर्कल क्षेत्र में जलवाहिनी के कार्य के लिए मुख्य सड़क के बीचोंबीच खुदाई की गई थी। काम पूरा होने के बाद गड्ढे में केवल मिट्टी डालकर उसे अस्थायी रूप से भर दिया गया था। सड़क को पूरी तरह समतल एवं मजबूत नहीं किए जाने के कारण यहां खतरनाक स्थिति बनी हुई थी।
इसी स्थान से एसटी बस गुजरते समय उसके दोनों पहिए मिट्टी में धंस गए और बस का अगला हिस्सा वहीं फंस गया। अचानक हुई इस घटना से बस में सवार यात्रियों में कुछ समय के लिए घबराहट का माहौल बन गया।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के नागरिक मौके पर पहुंचे। नागरिकों ने बस को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन बस काफी गहराई तक फंस जाने के कारण प्रयास सफल नहीं हुआ। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए दूसरी बस बुलाकर उन्हें रवाना किया गया।
बस को गड्ढे से बाहर निकालने के लिए जेसीबी बुलाया गया। जेसीबी की मदद से काफी मशक्कत के बाद देर रात बस को गड्ढे से बाहर निकाला गया।
व्यस्त मुख्य मार्ग पर खुदाई के बाद केवल मिट्टी डालकर गड्ढा भरने की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठ रहे हैं। यदि इसी तरह दोपहिया वाहन या अन्य छोटे वाहन गड्ढे में फंस जाते तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। इस घटना ने सड़क खुदाई के बाद उसे सुरक्षित तरीके से पूर्ववत करने और संबंधित कार्य की गुणवत्ता की निगरानी की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है।
पुराने नासिक के द्वारका, टाकली रोड सहित अन्य क्षेत्रों में भी सड़क खुदाई के बाद गड्ढे पूरी तरह नहीं भरने के कारण वाहनों के फंसने तथा दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद व्यस्त सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत में हो रही देरी को लेकर नागरिकों में नाराजगी है।
नागरिकों ने मांग की है कि सड़क पर खुदाई करने वाली संबंधित एजेंसियों द्वारा काम पूरा होने के तत्काल बाद सड़क को सुरक्षित एवं यातायात योग्य स्थिति में लाया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और वाहन चालकों व यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।