Nashik Road Safety Audit Delay: नासिक शहर में सड़क सुरक्षा का मुद्दा केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। पिछले पांच वर्षों में सड़क हादसों में 1100 लोगों की जान जाने के बावजूद प्रशासन अब भी सुस्त रवैये और लालफीताशाही में फंसा हुआ है।
शहर के 28 खतरनाक 'ब्लैक स्पॉट' का अब तक वैज्ञानिक तरीके से 'रोड सेफ्टी ऑडिट' नहीं हो सका है, जिससे नासिक के नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
जिलाधिकारी को अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें नियमित रूप से होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस उपायों का अभाव है। शहर के 28 खतरनाक स्थानों के सुधार की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बंटी है।
मनपाः 12 ब्लैक स्पॉट की जिम्मेदारी, जहां केवल कुछ ही जगहों पर छोटे-मोटे सुधार किए गए हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गः इनके हिस्से में 08 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट आते हैं, जहाँ सुधार कार्य पूरी तरह लंबित हैं।
लोक निर्माण विभागः शेष 06 ब्लैक स्पॉट की जिम्मेदारी इस विभाग पर है, जहां फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। प्रशासनिक विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण सुधार कार्य फाइलों में अटके हुए हैं और आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से सड़कों की बनावट में बदलाव न होना ही इन मौतों की मुख्य वजह है। द्वारका और गडकरी चौक भारी ट्रैफिक जाम और इंजीनियरिंग दोष के कारण लगातार होने वाले हादसों का मुख्य केंद्र।
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सीबीएस और आडगाव नाका फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग की कमी से पैदल चलने वालों के लिए सबसे असुरक्षित स्थान, कार्बन नाका और राऊ होटल भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और अवैध पार्किंग से हमेशा खतरा बना रहता है। वेद मंदिर और दत्त मंदिर दोषपूर्ण मोड और डिवाइडर की गलत ऊंचाई लापरवाही का नतीजा है।