नासिक किसान आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
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नासिक रिंग रोड अलाइनमेंट पर उठे सवाल, किसान नेता करण गायकर ने की अधिकारियों के निलंबन की मांग

Nashik Farmers Protest: नासिक रिंग रोड परियोजना के अलाइनमेंट में कथित अनियमितताओं को लेकर 15 गांवों के किसानों ने विरोध जताया। करण गायकर ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • नासिक रिंग रोड परियोजना के अलाइनमेंट को लेकर किसानों ने सवाल उठाए हैं।

  • परियोजना से प्रभावित करीब 15 गांवों के किसानों ने एमएसआईडीसी के नासिक कार्यालय पर मोर्चा निकालकर धरना दिया।

  • प्रदर्शनकारियों ने किसानों के घरों, कुओं और सिंचित कृषि भूमि को बचाने के लिए अलाइनमेंट की दोबारा जांच करने की मांग की।

Nashik Ring Road Alignment Dispute: नासिक रिंग रोड परियोजना के अलाइनमेंट में कथित अनियमितताओं, किसानों के बीच जानबूझकर विवाद पैदा करने और शासन के आदेशों का पालन नहीं करने के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर मामले की गहन जांच कराने की मांग की गई है। छावा क्रांतिवीर सेना के संस्थापक अध्यक्ष करण गायकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की।

नासिक रिंग रोड परियोजना से प्रभावित करीब 15 गांवों की महिला किसानों और अन्य किसानों ने करण गायकर के नेतृत्व में महाराष्ट्र राज्य अवसंरचना विकास महामंडल (एमएसआईडीसी) के नासिक कार्यालय पर मोर्चा निकालकर धरना दिया। आंदोलन में करीब 100 महिला किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अधिकारियों की कार्यप्रणाली के प्रति तीव्र नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा

महामंडल के कार्यकारी अभियंता कोली और संदीप पडंगले से जवाब मांगते हुए प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सवाल उठाया कि सड़क का अलाइनमेंट किसानों के घरों और जमीनों से होकर क्यों तय किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री द्वारा पुनः सर्वेक्षण के आदेश दिए जाने की बात के बावजूद अब तक वास्तविक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि अलाइनमेंट में खामियों को लेकर सवाल उठाए जाने पर संबंधित अधिकारियों ने इसे तय करते समय कुछ गंभीर गलतियां होने की बात स्वीकार की। साथ ही, वरिष्ठ कार्यालय को वास्तविक स्थिति पर आधारित रिपोर्ट भेजने का आश्वासन भी दिया गया। करण गायकर ने आरोप लगाया कि एक ओर किसानों को आंदोलन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो दूसरी ओर उन्हें गुमराह किया जा रहा है।

अलाइनमेंट में बदलाव किया जा सकता है

सारूल गांव के गट नंबर 25 का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल किया कि यदि कुछ चुनिंदा आईएएस, आईपीएस और राजस्व विभाग के सरकारी अधिकारियों के लिए अलाइनमेंट में बदलाव किया जा सकता है, तो आम किसानों के घरों, कुओं और सिंचित कृषि भूमि को बचाने के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय की ओर रुख किया और निवासी उपजिलाधिकारी राजपूत से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और जिले के पालकमंत्री गिरीश महाजन द्वारा किसानों को न्याय दिलाने के प्रति सकारात्मक रुख अपनाए जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर टालमटोल की जा रही है।

ज्ञापन में मांग की गई कि जिन गांवों में भूमि अधिग्रहण के अंतिम मुआवजा निर्णय अभी लंबित हैं, वहां जमीनों के बाजार मूल्य का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। इसके लिए उच्चतम खरीद दरों को ध्यान में रखा जाए तथा सिंचित कृषि भूमि के लिए नियमानुसार उचित गुणांक लागू कर न्यायसंगत मुआवजा तय किया जाए। किसानों ने यह भी मांग की कि पुनः जांच और आवश्यक निर्णय पूरे होने से पहले जल्दबाजी में मुआवजे के अंतिम निर्णय घोषित न किए जाएं।

मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए

करण गायकर ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पालकमंत्री गिरीश महाजन ने किसानों को न्याय दिलाने के संबंध में सकारात्मक रुख अपनाया है। इसके बावजूद हमारा आरोप है कि जिला प्रशासन और एमएसआईडीसी के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। हमारे संज्ञान में आया है कि नए अलाइनमेंट से प्रभावित होने वाले किसानों को गलत जानकारी देकर उनके बीच आपसी विवाद पैदा किए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

तत्काल संज्ञान लेने की मांग

अलाइनमेंट की दोबारा जांच करके किसानों के घरों, जमीनों और सिंचित कृषि भूमि को बचाया जाना चाहिए। गायकर ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को न्याय नहीं मिला, तो कुंभ मेले के ध्वजारोहण के दिन सामूहिक आत्मदाह आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने शासन से इस गंभीर चेतावनी पर तत्काल संज्ञान लेने और उससे पहले ही न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग की। इस आंदोलन में छावा क्रांतिवीर सेना के संस्थापक अध्यक्ष करण गायकर, प्रवीण पाटील, दीपक हगवणे, सुदर्शन पाटील, अक्षय कातड, रवि पेखले, सागर लोणे, दशरथ हगवणे और वैभव दलवी सहित 15 गांवों की महिला किसान और अन्य किसान उपस्थित रहे।

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