रामकुंड में गोदावरी नदीपात्र और ब्लू फ्लड लाइन के भीतर निर्माण पर विवाद।
याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने हाईकोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
विभागीय आयुक्त को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग।
लंबित PIL 2012 और CP 2025 मामलों का हवाला।
रामकुंड के कार्य पूरे नहीं होने के बीच प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर।
Nashik Ramkund High Court Order Illegal Construction: नासिक के रामकुंड परिसर में गोदावरी नदीपात्र और नीली बाढ़ रेखा के भीतर कथित निर्माण कार्यों को लेकर विवाद फिर तेज हो गया है। याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने उच्च न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विभागीय आयुक्त को पत्र भेजा है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
रामकुंड परिसर में गोदावरी नदीपात्र और नीली बाढ़ रेखा (ब्लू फ्लड लाइन) के भीतर कथित निर्माण कार्यों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने इन कार्यों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
पंडित ने इस संबंध में विभागीय आयुक्त को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका (PIL 2012) और अवमानना याचिका (CP 2025) का हवाला देते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
याचिकाकर्ता का दावा है कि रामकुंड क्षेत्र में नदीपात्र से सीमेंट कंक्रीट हटाने संबंधी पुराने आदेशों पर अमल लंबित है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से नए अस्थायी या पक्के निर्माण की तैयारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
राजेश पंडित ने कहा कि गोदावरी नदी का उत्सव और सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके साथ नदी को स्वच्छ और अबाधित बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि नदीपात्र में निर्माण से जुड़े मामलों में न्यायालय के आदेशों का पालन प्राथमिकता से होना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने दिसंबर 2018 के अंतिम निर्णय के अनुच्छेद 37 का उल्लेख करते हुए कहा कि नदीपात्र या उसके आसपास अनधिकृत निर्माणों को हटाने और भविष्य में अस्थायी या स्थायी निर्माण रोकने के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि न्यायालय की अनुमति के बिना नदीपात्र या नीली बाढ़ रेखा के भीतर निर्माण की अनुमति देना न्यायालय के आदेशों की अवमानना का विषय बन सकता है। हालांकि, कथित उल्लंघन और संबंधित कार्यों की वैधानिक स्थिति का अंतिम निर्धारण आधिकारिक आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
याचिकाकर्ता ने विभागीय आयुक्त और उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि नदीपात्र में किसी भी नए निर्माण से पहले न्यायालय के आदेशों और लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ध्वजारोहण समारोह में अब कुछ ही दिन शेष रहने के बावजूद रामकुंड परिसर के कार्य पूरे नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और न्यायालय से आगे कोई हस्तक्षेप होता है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।