नासिक में प्याज की कीमतें बढ़ीं (फोटो नवभारत)
नासिक

प्याज पर सरकारी उपाय बेअसर? बफर स्टॉक के बावजूद प्याज हुआ महंगा, नासिक में थोक भाव 49, खुदरा 70 रुपये किलो

Nashik Onion Prices Rise: सरकारी बफर स्टॉक और प्याज एक्सप्रेस के बावजूद नासिक के लासलगांव में प्याज के भाव बढ़े है। थोक कीमत 49 और खुदरा बाजार में 70 रुपये किलो तक पहुंची।

आलोक उमाकृष्ण

Onion Retail Rate Seventy Rupees: देश भर में प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बफर स्टॉक से आपूर्ति, विशेष 'प्याज एक्सप्रेस' के माध्यम से बड़े महानगरों तक प्याज की खेप भेजने और जमाखोरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने जैसे अनेक दावे किए जा रहे हैं।

इसके बावजूद एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव कृषि उत्पन्न बाजार समिति में प्याज के दामों में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। महज कुछ ही नीलामी सत्रों के भीतर औसतन दरों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बफर स्टॉक के नुकसान पर उठे गंभीर सवाल

गुरुवार 3 सितंबर को नासिक जिले के लासलगांव मंडी में प्याज का न्यूनतम भाव 1200 रुपये, अधिकतम 4930 रुपये और औसत भाव 4450 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया। महंगाई से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बाजार में उतारा है।

हालांकि, इस व्यापक सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद लासलगांव में थोक भाव 44 से 49 रुपये प्रति किलो और खुदरा (रिटेल) बाजारों में प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। दूसरी ओर, इस साल सरकार द्वारा खरीदे गए लगभग 1.20 लाख टन ग्रीष्मकालीन (गर्मी के) प्याज में से बड़ा स्टॉक वैज्ञानिक भंडारण के अभाव में सड़ने, अंकुरित होने और खराब होने के कारण नष्ट हो गया है।

मंडी में प्याज की आवक के साथ बढ़ीं कीमतें

इससे पहले मंगलवार को मंडी में प्याज का अधिकतम भाव 4860 रुपये और औसत भाव 4400 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था। वहीं, बुधवार 2 सितंबर को कुल 6882 क्विंटल प्याज की आवक और नीलामी हुई, जिसमें अधिकतम भाव 4900 रुपये और औसत भाव 4300 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था।

भंडारण में भारी नुकसान से किसान बेहाल

चांदवड़ के प्याज उत्पादक किसान दिलीप ठोंबरे का कहना है कि कागजों और मंडियों में प्याज की कीमतें भले ही बढ़ती दिख रही हो, लेकिन असल में किसानों की जेब खाली है।

वाली (भंडारण गृह) में लंबे समय तक रखे रहने के दौरान प्याज का वजन काफी घट जाता है, गुणवत्ता खराब हो जाती है और रखरखाव की लागत अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे किसानों को वास्तविक मुनाफा नहीं मिल पाता।

क्षेत्रीय किसानों ने मांग की है कि केंद्र व राज्य सरकार केवल दरों को दबाने के बजाय किसानों के इस व्यावहारिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए स्थाई व दीर्घकालिक कृषि नीतियां बनाए।

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