प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नासिक

नासिक में नामांकन के दिन सियासी रेस, भाजपा अध्यक्ष की गाड़ी का पीछा, सड़कों पर राजनीति का रोमांच

BJP Ticket Race: नासिक मनपा चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन BJP AB फॉर्म के लिए शहर की सड़कों पर अनोखा सियासी दृश्य दिखा। टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों ने शहराध्यक्ष की गाड़ी का फिल्मी अंदाज में पीछा किया।

अंकिता पटेल

Nashik Municipal Election Hindi News: नासिक महानगरपालिका चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन नासिक की सड़कों पर एक ऐसा राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जिसने सबको हैरान कर दिया। भाजपा के टिकट और एबी फॉर्म पाने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों ने शहराध्यक्ष सुनील केदार की गाड़ी का फिल्मी अंदाज में पीछा किया। इस 'सियासी रेस' में केवल कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि विधायक राहुल ढिकले और विधायक सीमा हिरे भी शामिल थीं।

हाईवे पर एक घंटे तक चला सियासी थ्रिलर

बीते कुछ दिनों से भाजपा के भीतर निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लग रहे थे। मंगलवार को जब टिकट वितरण की बारी आई, तो असंतोष सड़क पर आ गया।

पंचवटी और नए सिडको क्षेत्र के इच्छुक उम्मीदवारों को जब लगा कि उन्हें टिकट नहीं मिल रहा है, तो उन्होंने सीधे एबी फॉर्म ले जा रही शहराध्यक्ष की गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया।

नासिक-मुंबई महामार्ग पर करीब एक घंटे तक यह अफरातफरी मची रही। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बाहरी लोगों (आयारामों) को महत्व देने के चक्कर में पार्टी के पुराने साथियों की अनदेखी की गई है।

जेल में बंद पूर्व नगरसेवक के पुत्र को टिकट

इस हंगामे के बीच भाजपा ने एक चौंकाने वाला निर्णय भी लिया है। हत्या के मामले में जेल में बंद पूर्व नगरसेवक उद्धव निमसे के पुत्र रिद्धीश निमसे को पार्टी ने उम्मीदवार घोषित किया है- उद्धव निमसे धोत्रे हत्याकांड के आरोपी हैं और फिलहाल कारागृह में हैं।

प्रभाग में पार्टी की मजबूती और जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने रिद्धीश पर दांव लगाया है। रिद्धीश निमसे ने मीडिया से कहा, रविकास के मुद्दे पर जनता हमारे साथ है और हमारी जीत सुनिश्चित है।

भाजपा की चुनावी छवि पर सवाल

  • हाईवे पर हुए इस ड्रामे ने भाजपा के टिकट वितरण की अव्यवस्था को उजागर कर दिया है।
  • जहाँ एक ओर निष्ठावान कार्यकर्ता सड़कों पर दौड़ रहे हैं, वहीं दूसरी और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले परिवार को टिकट देने से पार्टी के भीतर और बाहर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
  • अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आंतरिक कलह का असर चुनाव परिणामों पर क्या पड़ता है।

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