Nashik Municipal Corporation: नासिक मनपा की महासभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा प्रशासनिक शासनकाल के दौरान आवंटित विकास निधि का मुद्दा गरमा गया है। भाजपा पार्षद सुधाकर बडगुजर ने सवाल उठाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उस समय सभी वार्डों के पार्षदों को समान रूप से विकास निधि क्यों नहीं दी। इस पर पलटवार करते हुए शिंदे गुट के नेता अजय बोरस्ते ने पूछा कि शहर के भाजपा विधायकों को भी सैकड़ों करोड़ रुपये दिए गए थे, उन्होंने उन पैसों से क्या काम किया? इस बहस के कारण सदन में भाजपा बनाम शिंदे गुट जैसी स्थिति निर्मित हो गई।
सदन में जब ठाकरे गुट द्वारा निधि के असमान वितरण को लेकर नारेबाजी की जा रही थी, तब शुरुआत में शांत रहे शिंदे गुट ने बाद में इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया। अजय बोरस्ते ने बजट को तैयार करने वाली अदृश्य शक्तियों पर तंज कसते हुए कहा कि विशिष्ट वार्डों को निधि देते समय भेदभाव किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग कर पार्षदों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
इससे पहले, भाजपा के सुधाकर बडगुजर ने एकनाथ शिंदे के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा था कि उस समय केवल चुनिंदा पार्षदों को ही निधि दी गई थी। इसके जवाब में बोरस्ते ने कहा कि तत्कालीन पालक मंत्री दादा भुसे ने भी जिला योजना समिति से निधि दी थी, लेकिन वह काम मनपा के बजाय सार्वजनिक निर्माण विभाग से क्यों कराए गए?
शिंदे गुट के प्रवीण तिदमे ने भी इस विवाद में कूदते हुए आरोप लगाया कि दिव्यांग कल्याण और पिछड़ा वर्ग बस्तियों के लिए आरक्षित निधि में कटौती कर वार्ड संख्या 25 की सड़कों के लिए 8 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उनका सीधा निशाना सुधाकर बडगुजर पर था। तिदमे ने प्रमाण प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि स्थायी समिति द्वारा प्रस्तावित 133 करोड़ रुपये की निधि का 60 प्रतिशत हिस्सा केवल 6 वार्डों में बांट लिया गया है। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि वार्ड 3 के लिए 26।66 करोड़ और वार्ड 25 के लिए 20।75 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि वार्ड 14, 15, 26 और 28 को 'शून्य' निधि देकर पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
मनपा के वार्षिक बजट में सिडको क्षेत्र की सड़कों, पानी और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए विशेष प्रावधान न किए जाने से स्थानीय पार्षदों में भारी रोष है। इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर सिडको क्षेत्र के सभी दलों के पार्षदों ने एकजुटता दिखाई और महासभा के दौरान महापौर को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। पिछली महासभा और स्थायी समिति की बैठकों में सिडको की पुरानी ड्रेनेज लाइनों की समस्या पर विस्तृत चर्चा हुई थी। सिडको की बढ़ती जनसंख्या और बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण 30 साल पहले डाली गई ड्रेनेज लाइनें अब पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुकी हैं।
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इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र में आए दिन ड्रेनेज का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है, जिससे दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। पार्षदों ने मांग की थी कि सिडको की सभी पुरानी ड्रेनेज लाइनों को बदलने के लिए बजट में पर्याप्त निधि का प्रावधान किया जाए। हालांकि, हालिया बजट में इसके लिए कोई ठोस वित्तीय व्यवस्था न होने पर मुकेश शहाणे, बंटी तिदमे, डॉ. पूनम महाले, दिलीप दातीर, किरण गामणे और सुवर्णा मटाले सहित सभी सर्वदलीय पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपनी आवाज बुलंद की है। पार्षदों का कहना है कि जनहित के इन कार्यों के लिए प्रशासन को तत्काल ध्यान देना चाहिए।