Nashik Iran Israel Conflict Impact ( Source: Social Media ) 
नासिक

खाड़ी युद्ध का असर: महंगा हुआ ट्रांसपोर्ट, नासिक लासलगांव प्याज निर्यात 45% की भारी गिरावट

Nashik Lasalgaon Onion Export: नासिक के लासलगांव से प्याज निर्यात पर युद्ध का असर, खाड़ी देशों में 45% गिरावट। बढ़ती कंटेनर लागत से निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ीं।

अंकिता पटेल

Nashik Iran Israel Conflict Impact: नासिक लासलगांव अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का सीधा असर अब देश के प्याज निर्यात पर दिखने लगा है। युद्धजन्य परिस्थितियों के कारण खाड़ी देशों को होने वाले प्याज के निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

कृषि उत्पाद निर्यातक संघ के उपाध्यक्ष विकास सिंह के अनुसार, युद्ध के कारण कंटेनर परिवहन लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई है। मार्च 2026 में खाड़ी देशों को लगभग 350 कंटेनर प्याज का निर्यात किया गया, जबकि मार्च 2025 में यह आंकड़ा 600 कंटेनर था। वैश्विक स्तर पर भी कुल प्याज निर्यात में 35 प्रतिशत की कमी आई है।

किसानों की बढ़ी चिंता

निर्यात घटने का सीधा असर एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति में देखने को मिला। मार्च 2026 में ग्रीष्मकालीन प्याज का अधिकतम भाष 1500 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2627 रुपये था। लाल प्याज के दाम भी 3101 रुपये से घटकर 1417 रुपये पर आ गए हैं। इस गिरावट ने किसानों को भारी आर्थिक संकट में डाल दिया है।

परिवहन लागत और प्रतिस्पर्धा बड़ी चुनौती

निर्यातकों के अनुसार, खाड़ी देशों के लिए कंटेनर का किराया जो पहले 600-700 डॉलर था, अब बढ़कर 6500 डॉलर हो गया है। इसके अलावा, यमन और मिस्र जैसे देश सड़क मार्ग (ट्रक) के जरिए सस्ते दामों पर प्याज खाड़ी बाजारों में पहुंचा रहे है, जिससे भारतीय प्याज की मांग घटी है। लासलगांव मंडी के व्यापारी निदेशक प्रवीण कदम ने केंद्र सरकार से कंटेनर भाड़े पर नियंत्रण और निर्यात के लिए 10 प्रतिशत सब्सिडी देने की मांग की है।

वर्षवार प्याज निर्यात के आंकड़े और विदेशी मुद्रा पर एक नजर

क्रमांक वर्ष निर्यात (लाख टन) विदेशी मुद्रा (₹ करोड़ में)
1 2018–19 21.83 3,468
2 2019–20 11.49 2,340
3 2020–21 15.77 2,826
4 2021–22 15.37 3,432
5 2022–23 25.25 4,522
6 2023–24 17.17 3,922
7 2024–25 11.47 3,822
8 2025–26 (जनवरी तक) 12.83 2,970

प्याज के मौजूदा भाव से उत्पादन लागत भी नहीं निकल रही है। घर खर्च और बच्चों की शिक्षा का बोझ उठाना मुश्किल हो गया है। सरकार को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोजने चाहिए।

- प्याज उत्पादक किसान, निवृत्ती न्याहारकर

नासिक जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पहले ही फसल क नुकसान हुआ है, ऊपर से युद्ध ने निर्यात रोक दिया। हम रेलवे के माध्यम से घरेलू परिवहन बढ़ाने और केंद्र सरकार से निर्यात प्रोत्साहन के लिए लगातार सपर्क में हैं।

- सभापति, लासलगांव मंडी समिति, ज्ञानेश्वर जगताप

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