प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया ) 
नासिक

लाल तूफान मोर्चा: किसान सभा का मुंबई कूच, हजारों किसानों का मार्च सड़कों पर जनसैलाब

Farmers Protest: किसानों व मजदूरों की लंबित मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा की ‘लाल तूफान’ पदयात्रा नाशिक पहुंची। प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए मोर्चा मुंबई के लिए रवाना हुआ, जिससे कुछ समय यातायात

अंकिता पटेल

Indian Farmers Movement: नासिक किसानों और मजदूरों की विभिन्न लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा आयोजित लाल तूफान पदयात्रा रविवार को नासिक पहुंची। हजारों आंदोलनकारियों की जोरदार नारेबाजी से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने नासिक की प्रमुख सड़कों से मार्च करते हुए मुंबई की ओर कूच किया। शनिवार को इस मोर्चे ने स्वास्थ्य विज्ञान विद्युविद्यालय के सामने वन विभाग के मैदान में डेरा डाला था। इसके बाद दोपहर में यह मोर्चा नासिक शहर में दाखिल हुआ। वहां से यह म्हसरुल, निमाणी, अशोक स्तंभ मार्ग होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के सामने से मुंबई नाका पहुंचा। यहां कुछ समय के लिए मोर्चे ने धरना दिया। उस दौरान यातायात बाधित हो गया था। इसके बाद मोर्चा मुंबई के लिए रवाना हो गया।

हजारों किसान हुए शामिल

अखिल भारतीय किसान सभा का यह मोर्चा शुक्रवार सुबह दिडोरी स्थित संस्कृति लॉन्स से शुरू हुआ था। इस आंदोलन में दिडीरी, सुरगाणा, कळवाण, चांदवड, नांदगांव, येवला, निफाड, पेठ, हरसूल, त्र्यंबक, घोटी और इगतपुरी सहित पूरे नासिक जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से हजारों किसान और आदिवासी शामिल हुए है। इस मोर्च का नेतृत्य मुख्य रूप से पूर्व विधायक जे। पी। गावित, डॉ। डी। एल। कराड, भिका राठौड़, जनार्दन भोये, उत्तम काडू, इंद्रजीत माचित्त और विजय बांगले कर रहे हैं।

पूर्व विधायक जे. पी. गावित कर रहे नेतृत्व

नासिक से मुंबई के लिए रवाना हुआ यह मोर्चा रविवार को अंबे बोहरला में ठहराव करेगा। इसके बाद यह सिन्नर की ओर आगे बढ़ेगा। मोर्चा मुख्य मागों से गुजरने वाला है। जिससे यातायात प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि मोर्चा अनुशासित है, लेकिन इसमें शामिल लोगों की संख्या काफी बड़ी है।

आंदोलनकारियों की ये हैं मांगें

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, वन भूमि और गायरान धारकों को अलग सातबारा (भूमि अभिलेखख) प्रदान करना, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाना और पश्चिम की और बहने वाली नदियों का पानी स्थानीय लोगों को उपलब्ध कराना शामिल है।

आदिवासी बाधयों, किसानों की लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए निकले अखिल भारतीय किसान सभा का 'लाल तूफान मोर्चा ने रविवार को सुबह ही म्हसरूल से डेरा उठाया और नारों से आकाश गूंजते हुए नासिक शहर से होकर गुजरा।

करीब 3 किलोमीटर से अधिक रास्ता घेरे हुए हजारों आदिवासी बंधु-किसानों का अनुशासित मोर्चा शहरी नागरिकों के कौतूहल का विषय बन गया है। उसे देखने के लिए रविवार होने पर भी नागरिकों ने दोनों ओर भीड़ लगाई थी।

उनका जगह-जगह स्वागत हो रहा था और उन्हें समर्थन भी दिया गया। मोर्चे में सभी को शिक्षा, सभी को काम मिलना ही चाहिए, कृषि उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना ही चाहिए आदि नारे लगाए गए।

आदिवासी बहुल सहित अन्य तालुकों से हजारों किसान अपनी मार्ग लेकर मुंबई कूव करने वाले हैं। वे शनिवार की रात नासिक शहर की हद में पहुंचे थे। महसरूल स्थित आरोग्य विज्ञान विश्वविद्यालय के सामने वनविभाग के परिसर में उन्होंने डेरा डाला था, रात देर तक मोर्चेकरी उहुंचते ही जा रहे थे।

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