साधुग्राम भूमि अधिग्रहण (सोर्सः सोशल मीडिया)
नासिक

Nashik Kumbh Mela 2027: साधुग्राम के लिए भूमि अधिग्रहण का किसानों ने किया विरोध, कोर्ट जाने की तैयारी

Sadhugram Land Acquisition: नासिक में सिंहस्थ कुंभ 2027 के लिए साधुग्राम हेतु नांदूर और टाकली की करीब 1000 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण का किसानों ने विरोध किया है।

आंचल लोखंडे

Nashik Farmers Protest: सिंहस्थ कुंभमेला 2027 के मद्देनजर प्रशासन द्वारा साधुग्राम के लिए नांदूर और टाकली क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का साधुग्राम शेतकरी कृति समिति ने कड़ा विरोध किया है। किसानों का आरोप है कि पिछले ढाई दशकों में डीपी रोड, छत्रपति संभाजीनगर रोड, साधुग्राम और एसटीपी संयंत्र के लिए ली गई जमीनों का मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है।

प्रशासन ने नासिक, नांदूर और टाकली शिवार की लगभग 1000 एकड़ जमीन साधुग्राम के लिए अस्थायी रूप से अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके खिलाफ किसानों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई पूरी होने तक स्थगानादेश देते हुए किसानों की आपत्तियां सुनने का निर्देश दिया। आदेश के तहत अपर तहसीलदार अमोल निकम के समक्ष सुनवाई शुरू हुई, जहां किसानों ने अपने स्वामित्व, आजीविका और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज पेश किए।

किसानों का आरोप और चेतावनी

कृति समिति के अध्यक्ष समाधान जेजुरकर और किसानों ने कहा कि कुंभमेला रामकुंड में आयोजित होता है और उनकी उपजाऊ जमीनों का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने विकास योजना (डीपी) की जमीनों के लिए 900 करोड़ रुपये का आवंटन किया, लेकिन किसानों का पुराना बकाया अटका रखा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं हुआ, तो वे कुंभमेले के दौरान अपनी जमीन पर कब्जा कर खुदाई शुरू कर देंगे।

प्रशासनिक पक्ष और पूर्व अनुभव का डर

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अदालती निर्देशों के अनुसार सुनवाई पूरी होने तक स्थिति यथावत रखी जाएगी और सभी कानूनी आपत्तियों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। 2027 के कुंभमेले के लिए कुल 1,618 एकड़ में साधुग्राम प्रस्तावित है, जिसमें तपोवन की 318 एकड़ जमीन स्थायी रूप से अधिग्रहित की जानी है।

मुआवजे के बकाया भुगतान पर प्रशासन को घेरा

किसानों का कहना है कि 2015 के कुंभमेले के दौरान जमीन वापस करते समय उसे पुनः खेती योग्य बनाने का प्रशासनिक वादा पूरा नहीं किया गया था। कंक्रीट, पत्थर और मुरम पड़े रहने के कारण कई एकड़ उपजाऊ भूमि हमेशा के लिए खराब हो गई, जिससे किसान इस बार अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।

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