बढते तापमान की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नासिक

Nashik Heatwave 2026: नासिक बना तंदूर, दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर सन्नाटा, सूरज का तांडव जारी

Nashik Heatwave News: नासिक शहर और जिले में बढ़ते तापमान और लू ने मचाया हाहाकार। तीन दशक बाद नासिक की जलवायु में आया बड़ा बदलाव, डॉक्टरों ने दी हीट स्ट्रोक की चेतावनी।

गोरक्ष पोफली

Temperature Rise in Nashik: नासिक शहर और आसपास के जिलों में सूर्य देव के रौद्र रूप ने नागरिकों का हाल बेहाल कर दिया है। स्थिति यह है कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि सड़कों पर अघोषित 'कर्फ्यू' जैसा सन्नाटा पसर जाता है। लोग जरूरी काम के बिना घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। शाम होने के बावजूद गर्म हवाओं और उमस का असर कम नहीं हो रहा है, जिससे रात के समय भी बेचैनी बनी रहती है। चिलचिलाती धूप ने नासिककरों के चैन के साथ-साथ शहर की रौनक भी छीन ली है।

कंक्रीट के जंगलों का साइड इफेक्ट

कभी अपनी ठंडी और खुशनुमा जलवायु के लिए मशहूर नासिक अब 'हॉट सिटी' में तब्दील होता जा रहा है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि तीन दशक पहले तक यहाँ की हवाओं में जो ठंडक और ताजगी थी, वह अब बढ़ते शहरीकरण की भेंट चढ़ गई है। कंक्रीट के बढ़ते निर्माण और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। जिले के पहाड़, जो कभी हरे-भरे नजर आते थे, अब झुलसकर भूरे और पथरीले हो गए हैं। तीर्थयात्रियों की बढ़ती भीड़ और वाहनों के धुएं ने इस तपिश को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है।

लू का 'टॉर्चर' और सेहत पर संकट

बढ़ते तापमान और लू (Heatwave) के थपेड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आने और हीट स्ट्रोक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें और यदि निकलना अनिवार्य हो, तो सिर को सफेद सूती कपड़े से ढककर निकलें। शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने के लिए नींबू पानी, छाछ और ओआरएस (ORS) का अधिक से अधिक सेवन करने की अपील की गई है।

क्या खो गया पुराना नासिक?

बढ़ता तापमान न केवल इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी काल बन रहा है। शुष्क होते पहाड़ और सूखते जलस्रोत इस बात का प्रमाण हैं कि पर्यावरण के साथ हुई छेड़छाड़ का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। जानकार बताते हैं कि यदि अभी भी वृक्षारोपण और जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले सालों में नासिक की गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। फिलहाल, नागरिक केवल बादलों के आने और मानसून की पहली फुहार का इंतजार कर रहे हैं ताकि इस 'आग उगलते' मौसम से कुछ राहत मिल सके।

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