Modi Meloni On Nashik Onion: महाराष्ट्र का नासिक जिला पूरे देश में अपनी प्याज (कांदा) की बंपर पैदावार के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात पाबंदियों और सही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) न मिलने के कारण यहाँ का किसान भारी वित्तीय संकट से गुजर रहा है। अपनी इसी बेबसी और गुस्से को देश के नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने के लिए बागलाण के युवा किसान किरण मोरे ने अपने भीतर के कलाकार को जगाया और एक ऐसा अनोखा व्यंगचित्र (कैरीकेचर) तैयार किया जिसने दिल्ली तक हलचल पैदा कर दी है।
किरण मोरे ने एक बड़े प्याज की सतह पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की खूबसूरत प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक बेहद सजीव रेखाचित्र बनाया है। इस रेखाचित्र के साथ उन्होंने सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल हुए 'मोदी-मेलोनी' (Melodi) के मीम्स को जोड़ते हुए एक बड़ा ही उपरोधिक (Sarcastic) संदेश लिखा है। इस कलाकृति का वीडियो सामने आते ही किसानों और इंटरनेट यूजर्स ने इसे हाथों-हाथ शेयर करना शुरू कर दिया है।
इस व्यंग्य के पीछे छिपे गहरे दर्द को बयां करते हुए किरण मोरे ने कहा, "इंटरनेट पर हर कोई पीएम मोदी और मेलोनी की तस्वीरों को 'मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?' वाले विज्ञापन से जोड़कर मजे ले रहा है। हमारा केंद्र सरकार से बस इतना ही कहना है कि प्रधानमंत्री जी, अगर आपने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को वह 'मेलोडी' चॉकलेट देने के बजाय हमारे नासिक का बेहतरीन कांदा (प्याज) उपहार में दिया होता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे प्याज के एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया होता, तो आज महाराष्ट्र के लाखों किसानों का भला हो गया होता।"
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ एक मजाकिया वीडियो नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार की प्याज निर्यात नीति (Export Policy) के खिलाफ कोंकण और देश के किसानों का एक अनूठा डिजिटल विद्रोह है। जब भी सरकार प्याज के निर्यात पर टैक्स बढ़ाती है या पूरी तरह बैन लगाती है, तो नासिक के लासलगांव और पिंपरी जैसे बड़े बाजारों में प्याज के दाम कौड़ियों के भाव गिर जाते हैं, जिससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पाती।
किसान किरण मोरे की इस बेबाक सोच और कला की सराहना अब देश के बड़े-बड़े मीम क्रिएटर्स और किसान संगठनों के नेता भी कर रहे हैं। वीडियो के वायरल होने के बाद से ही नासिक और बीड के किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार को सोशल मीडिया के इस ट्रेंड को केवल एक मजाक के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसके पीछे छिपे ग्रामीण भारत के किसानों के असली आर्थिक तनाव और आक्रोश को समझकर तुरंत प्याज के निर्यात को पूरी तरह कर-मुक्त करना चाहिए।