प्रतीकात्मक तस्वीर( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नासिक

कोर्ट नहीं, संवाद बना समाधान, 31 परिवारों की बची खुशहाली, सलोखा समिति की सुलह से रिश्तों को नया जीवन

Nashik Family Court: नाशिक फैमिली कोर्ट व सलोखा समिति के प्रयासों से टूटने की कगार पर पहुंचे 31 दंपतियों का साथ रहने फैसला। बातचीत के जरिए यह संदेश दिया कि विवाद नहीं, परिवार बचाना ही प्राथमिकता है।

अंकिता पटेल

Nashik Family Court News : नासिक फैमिली कोर्ट और 'सलोखा समिति' (सामंजस्य समिति) के लगातार प्रयासों से उन दंपतियों को फिर से एक करने में बड़ी सफलता मिली है, जिनके रिश्ते टूटने की कगार पर थे।

बीते वर्ष भर से चलाए गए संवाद और सुलह के प्रयासों के तहत, 31 जोड़ों ने फिर से एक साथ रहने का फैसला लिया और अपने वैवाहिक बंधन को बचाने का रास्ता चुना। यह संदेश साफ है कि अदालत में विवाद के बजाय परिवार को बचाना ही पहली प्राथमिकता है।

सुलह से कम हुआ अदालती बोझ

पारिवारिक विवादों के बढ़ते मामलों के बीच, कोर्ट ने न केवल तेजी से निपटारे पर जोर दिया, बल्कि काउंसलिंग और सुलह को भी प्राथमिकता दी, जिससे समझौते की दर में वृद्धि हुई है और कोर्ट का बोझ भी कम हुआ है।

क्रमांक विवरण मामलों की संख्या
1 लंबित मामले 4657
2 दायर किए गए मामले 2127
3 निपटाए गए मामले 1894
4 लोक अदालत में समझौते से निपटे 69
5 काउंसलिंग/समझाइश से निपटे 31

टूटे रिश्ते फिर जोडे नासिक फैमिली कोर्ट ने बच्चों के सर्वोत्तम हित के लिए लागू हुई CIL पहल काउंसलिंग और सुलह को भी प्राथमिकता दी, जिससे समझौते की दर में वृद्धि हुई है और कोर्ट का बोझ भी कम हुआ है।

बच्चों के सर्वोत्तम हित पर विशेष ध्यान

  • पालकों (अभिभावक) के विवादों का सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। इसे देखते हुए कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण पहल की हैं
  • 'लेट थीम ब्लूम' कार्यक्रमः इसका उद्देश्य बच्चों का भावनात्मक पुनर्निर्माण करना, उनकी भावनाओं, राय और जरूरतों को प्राथमिकता देना तथा विवाद से उत्पन्न मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाना है।
  • CIL (चिल्ड्रन इंडिपेंडेंट लॉयर पैनल) पहलः कस्टडी और मुलाकात के विवादों में नासिक फैमिली कोर्ट ने बच्चों के लिए स्वतंत्र वकील पैनल की स्थापना की है।
  • यह पहल बच्चों के स्वतंत्र दृष्टिकोण को अदालत तक पहुँचाती है और पालकों के अधिकारों के बजाय बच्चों के सर्वोत्तम हित पर विचार करने पर जोर देती है। यह पहल महाराष्ट्र में एक महत्वपूर्ण चलन बन रही है।

नए कोर्ट रूम की आवश्यकता

नासिक फैमिली कोर्ट में वर्तमान में दो न्याय कक्ष हैं, जबकि लंबित मामलों की संख्या साढ़े चार हजार से अधिक है। इसी कारण इस वर्ष एक अतिरिक्त न्याय कक्ष उपलब्ध कराया गया है।

मुख्य न्यायाधीश प्रसाद पालसिंगणकर की पहल पर, पाँच न्याय कक्षों वाली एक आधुनिक और सुसज्जित इमारत का 43 करोड़ रुपये का प्रस्ताव निर्माण विभाग के माध्यम से उच्च न्यायालय को भेजा गया है, जिसे 2026 में मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

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