नासिक विधान परिषद चुनाव, नरेंद्र दराडे ( सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो ) 
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नासिक MLC चुनाव: गिते बंधुओं की बगावत से महायुति में खलबली, नरेंद्र दराडे की राह आसान करने पहुंचे उदय सामंत

Nashik MLC Election: नासिक स्थानीय प्राधिकरण MLC चुनाव में भाजपा के पूर्व नगरसेवक गणेश गिते की निर्दलीय उम्मीदवारी से महायुति में बगावत, संकट टालने के लिए मंत्री उदय सामंत नासिक पहुंचे।

रूपम सिंह

Maharashtra Vidhan Parishad Narendra Darade: नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया में नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महायुति के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के खिलाफ भाजपा के पूर्व नगरसेवक गणेश गिते और उनके भाई गोकुल गिते द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में बने रहने से चुनावी समीकरण अचानक बदल गए हैं।

अब गिते बंधु नाम वापस लेंगे या अंत तक चुनाव मैदान में डटे रहेंगे, इस पर पूरे राजनीतिक गलियारे की नजरें टिकी हुई हैं। महायुति की ओर से शिवसेना के नरेंद्र दराडे को उम्मीदवार बनाया गया है। लेकिन गिते बंधुओं की उम्मीदवारी से दराडे के सामने चुनौती बढ़ने की चर्चा है।

गुरुवार नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन होने के कारण बुधवार देर रात तक पर्दे के पीछे राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना जताई जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में शिवसेना के नेता तथा मंत्री उदय सामंत नाशिक पहुंच चुके हैं और महायुति में समन्वय स्थापित करने के प्रयास जारी होने की चर्चा है।

गिते की स्वतंत्र राजनीतिक ताकत चर्चा में

माना जा रहा है कि देर रात होने वाली बैठको और चर्चाओं के बाद चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। पूर्व स्थायी समिति सभापति गणेश गिते ने इस चुनाव के लिए काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। भाजपा से उम्मीदवार बनने के लिए उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी की थी। लेकिन यह सीट शिवसेना शिंदे गुट के खाते में जाने के बाद उन्होंने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। संभावित दबाव को देखते हुए उन्होंने अपने भाई गोकुल गिते का भी नामांकन भरवा दिया, जिससे चुनाव में नया मोड़ आ गया है। इस चुनाव में कुल नौ उम्मीदवार मैदान में है। इनमें शिवसेना के नरेंद्र भिकाजी दराडे, एआईएमआईएम के मोहम्मद खालिद अब्दुल रशीद तथा निर्दलीय उम्मीदवार कुणाल नरेंद्र दराडे, कोकणी परवेज मोहम्मद युसूफ, गोकुल बाबन गिते, गणेश बाबन गिते, प्रसाद बलिराम हिरे, निवृत्ती देवराम बोडके और विष्णू रुंजा म्हैसधुने शामिल हैं।

गिते का दावा, कई नगरसेवक लगातार संपर्क में

स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में नगरसेवक और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के प्रतिनिधि ही मतदाता होते हैं। ऐसे में प्रत्येक मत का विशेष महत्व है। गणेश गिते ने दावा किया है कि 350 से अधिक नगरसेवकों ने उनसे संपर्क किया है। उनका कहना है कि कई नगरसेवकों में नाराजगी है और उसका लाभ उन्हें मिल सकता है। इसके अलावा गिते समर्थकों का कहना है कि इस चुनाव में पार्टी व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए मतदाताओं को मतदान में अधिक स्वतंत्रता रहेगी। ऐसे में यदि गिते बंधु अंत तक मैदान में बने रहते हैं तो मुकाबला और अधिक रोचक तथा कांटे का हो सकता है।

महाजन की भूमिका पर सबकी नजर

पूरे घटनाक्रम में राज्य के मंत्री गिरीश महाजन की भूमिका पर विशेष नजर बनी हुई है। गिते बंधुओं को नाम वापस लेने के लिए मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके प्रयास सफल होने पर नरेंद्र दराडे की जीत का रास्ता काफी आसान हो सकता है। हालांकि यदि गिते बंधु अपने फैसले पर अडिग रहते है तो महायुति के सामने आंतरिक असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग की चुनौती खड़ी हो सकती है। संख्याबल के लिहाज से महायुति स्पष्ट बढ़त में है।

भाजपा के 173, शिवसेना शिंदे गुट के 163 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के 96 नगरसेवक हैं। इस प्रकार महायुति के कुल 432 नगरसेवक है, जबकि विपक्षी दलों के नगरसेवकों की संख्या 182 है। इसके बावजूद स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों में राजनीतिक गणित से अधिक पर्दे के पीछे होने वाली गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए गुरुवार को होने वाली नाम वापसी की प्रक्रिया पर पूरे जिले की नजरें लगी हुई है।

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