छगन भुजबल के फार्म हाउस पर पुलिस तैनात 
नासिक

मराठा आरक्षण का विरोध करने वाले छगन भुजबल को खतरा! बढ़ाई गई सुरक्षा, फार्म हाउस पर पुलिस तैनात

Maratha Reservation: मराठा आरक्षण पर ओबीसी कोटे से हिस्सा देने का विरोध करने वाले मंत्री छगन भुजबल की सुरक्षा बढ़ाई गई। नाशिक फार्म हाउस पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

अर्पित शुक्ला

Nashik News: मराठा आरक्षण के मुद्दे पर खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री और ओबीसी नेता छगन भुजबल की तरफ से व्यक्त की गई राय के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। भुजबल ने ओबीसी आरक्षण से मराठा समुदाय को हिस्सा देने का स्पष्ट विरोध किया था, जिसके बाद उनके फार्म हाउस पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, गश्ती दल दिन-रात कड़ी सुरक्षा बनाए हुए हैं।

पिछले कुछ हफ्तों से राज्य में मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है, जिससे तनाव का माहौल बना हुआ है। मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण के लिए मुंबई में आंदोलन किया था। सरकार द्वारा आरक्षण के संबंध में सरकारी आदेश (जीआर) जारी करने के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली थी।

भुजबल को पहले भी मिली हैं धमकियां

इसके बाद मराठा और ओबीसी नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। छगन भुजबल पहले से ही ओबीसी आरक्षण से मराठों को हिस्सा देने का विरोध कर रहे हैं। इससे दोनों समुदायों के बीच माहौल गरमा गया है। भुजबल को पहले भी धमकियां मिल चुकी हैं।

इसी को लेकर पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के आदेश पर भुजबल फार्म में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अंबड पुलिस स्टेशन के तहत दिन-रात दो टीमों में एक अधिकारी और 12 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है। गश्ती दल लगातार निगरानी कर रहे हैं। भुजबल जिस भी जिले में होते हैं, वहां की स्थानीय पुलिस द्वारा भी उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जाती है।

भुजबल की चेतावनी

शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए भुजबल ने कहा कि राज्य सरकार ने आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे की हैदराबाद गजेटियर को लागू करने की मांग को स्वीकार कर एक नया संकट खड़ा कर दिया है। अब देश के अन्य राज्यों से भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं। हाल ही में सरकार ने मराठा समुदाय को आरक्षण का लाभ देने के लिए कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने हेतु हैदराबाद गजेटियर लागू करने की जरांगे की मांग मान ली थी। ओबीसी वर्ग के तहत मराठों को आरक्षण दिए जाने का विरोध कर रहे भुजबल ने आरोप लगाया कि नए सरकारी आदेश (जीआर) से ‘पात्र’ शब्द को हटा दिया गया है।

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