ट्रंप के खिलाफ पक्ष-विपक्ष एक साथ, RJD ने अमेरिकी राष्ट्रपति को अस्थिर बताया, CM फडणवीस ने क्या कहा?

India-US Relations: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर वैश्विक आलोचना का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने भारत के साथ संबंध सुधारने का संकेत दिया है।
CM devendra Fadnavis
देवेंद्र फडणवीस (Image- Social Media)
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Devendra Fadnavis News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ को लेकर दुनियाभर के देशों से आलोचना झेलनी पड़ रही है। इस दौरान ट्रंप ने भारत के साथ फिर से मजबूत संबंधों की ओर संकेत दिया। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना बेहद अच्छा दोस्त बताया। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति की भावनाओं और हमारे रिश्तों के सकारात्मक मूल्यांकन की सराहना करते हैं। इस दौरान भारत में अमेरिका-भारत संबंधों में आई खटास को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी जारी रही।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता मनोज झा ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, "इस समय दुनिया में अमेरिकी राष्ट्रपति से अधिक अस्थिर कोई नहीं है। हमें उनकी चाल में नहीं फंसना चाहिए। कूटनीति और दीर्घकालिक रिश्ते किसी दिखावे से तय नहीं होते। यदि हम अपनी विदेश नीति और संवाद की क्षमता को केवल प्रतीकों तक सीमित कर देंगे, तो हमें कुछ खास हासिल नहीं होगा।"

देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी महान हैं और बाकी देशों के नेता भी उन्हें सम्मान देते हैं। यह पीएम मोदी के नेतृत्व वाला नया भारत है, जो अपनी विदेश नीति खुद तय करता है। हमारी विदेश नीति पर किसी और का नियंत्रण नहीं हो सकता। चाहे कोई हमारे साथ खड़ा हो या नहीं, भारत 'विकसित भारत' की ओर निरंतर आगे बढ़ेगा।"

भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़

अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना बेहद करीबी मित्र कहा। इससे पहले दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी, जिसके बाद बयानबाज़ी का दौर शुरू हुआ था। भारत ने इस पूरे समय कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी और तथ्यों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। भारत ने रणनीतिक चुप्पी अपनाते हुए आगे बढ़ने का फैसला किया।

तनाव के दौरान नकारात्मक टिप्पणियों के बजाय सकारात्मक पहलुओं पर ज़ोर दिया गया। अब भारत का अगला कदम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति करना होगा, जिसके लिए नवंबर तक की डेडलाइन तय की गई है। यह अब साफ हो गया है कि कब बोलना है और कब शांत रहना है, यही कूटनीति की असली कसौटी है।

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