प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
नासिक

NEP 2020 के नाम पर भ्रम, 10वीं पासिंग पर बोर्ड से स्पष्टीकरण की मांग; 35% नियम अब भी लागू

Maharashtra State Board: कक्षा 10वीं पासिंग को लेकर फैल रही अफवाहों पर स्पष्टीकरण: महाराष्ट्र बोर्ड में हर विषय में न्यूनतम 35% अंक अनिवार्य हैं, इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

अंकिता पटेल

Nashik Board Clarification: नासिक महाराष्ट्र स्टेट सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट क्लास 10वीं बोर्ड परीक्षा के पासिंग क्राइटेरिया को लेकर अलग-अलग विद्यार्थियों को भ्रमित करने वाली जानकारी फैलाई गई है। खासकर, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के नाम पर कहा जा रहा है कि अगर कोई विद्यार्थी 100 में से 25 नंबर भी लाता है, तो भी वह पास हो जाएगा या अगर उसे गणित में 150 में से 38 नंबर भी आते हैं, तो भी वह पास माना जाएगा, इससे विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

इसी असमंजस को देखते हुए, जीवन केशरी मराठी स्टूडेंट ग्रुप के ग्रुप मुखिया प्रसाद भालेकर ने महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन के अध्यक्ष को एक पत्र देकर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

पास होने के लिए 35 प्रतिशत मार्क जरूरी इस बारे में और जानकारी देते हुए जीवन केशरी मराठी स्टूडेंट्स ग्रुप के ग्रुप प्रमुख प्रसाद भालेकर ने बताया कि भारत के संविधान के आर्टिकल 21 C और आर्टिकल 14 के नियमों, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की गाइडलाइंस, महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन एक्ट 1965 औरमहाराष्ट्र एजुकेशन एक्ट 1983 का डिटेल में आधार लेते हुए यह साफ किया गया है कि महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन के मौजूदा नियमों के मुताबिक, क्लास 10 के हर सब्जेक्ट में अलग-अलग कम से कम 35 परसेंट माक्र्स लाना जरूरी है। और यह क्राइटेरिया आज भी लागू है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

त्रिभाषा के अंतर को बताया गया

एजुकेशन एक्ट, 1965 के सेक्शन 4 और 5 के अनुसार, क्राइटेरिया तय करने और सर्टिफिकेट देने का अधिकार महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एड हायर सेकेंडरी बोर्ड के पास परीक्षा कराने, परीक्षा के नियम बनाने, पासिंग है। इन अधिकारी का इस्तेमाल करके, बोर्ड ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए नियम बनाए है और जिसके अनुसार हर विषय में 100 में से कम से कम 35% माक्र्स लाना जरूरी है। यह नियम सभी विषयों पर समान रूप से लागू होता है और इसमें कोई छूट नहीं है। त्रिभाषा सूत्र और पासिंग क्राइटेरिया के बीच का अंतर साफ किया गया है।

35% अंक नहीं मिलने से फेल माना जाएगा छात्र

हालांकि कुछ विषयों में ओरल एग्जाम, प्रैक्टिकल एग्जाम या इंटरनल असेसमेंट के मावर्स होते हैं। ये माक्र्स टोटल माक्र्स में शामिल होते हैं। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कोई स्टूडेंट सिर्फ ओरल या प्रैक्टिकल में 20 या 25 मावर्स लाने पर भी पास हो जाएगा, उदाहरण के लिए, अगर किसी सब्जेक्ट में 80 मावर्स स्टिन एग्जाम के हैं और 20 माक्र्स ओरल एग्जाम के हैं। ती टोटल 100 माक्र्स में से कम से कम 35 मावर्स लाना जरूरी है। अगर उसे सिर्फ औरल एग्जाम में 20 माक्र्स और रिटन एग्जाम में सिर्फ 5 या 10 माक्र्स मिलते हैं, तो टोटल मार्क्स 25 या 30 मार्क्स होंगे, जो 35% से कम है और स्टूडेंट फेल हो जाएगा।

क्रायटेरिया तय करना राज्य शिक्षा बोर्ड का अधिकार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बारे में सही जानकारी दी गई है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 एजुकेशन के तरीकों, टीचिंग, करिकुलम, इवैल्यूएशन के तरीकों और एग्जामिनेशन सुधारों के बारे में एक गाइड करने वाली पॉलिसी है। यह पॉलिसी एजुकेशन में हर तरह के सुधार पर जोर देती है।

हालांकि, यह पॉलिसी सीधे तौर पर स्टेट एजुकेशन बोर्ड के बोर्ड एग्जाम के पासिंग क्राइटेरिया में कोई बदलाव नहीं करती है। बयान में साफ़ किया गया है कि असली परीक्षा के नियम, पासिंग क्राइटेरिया और उन्हें लागू करना राज्य सरकार और संबंधित शिक्षा बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है।

शिक्षा मंत्री को भी लिखा गया है पत्र

ऐसे में गलत जानकारी फैलाना बहुत गंभीर मामला है। ज्ञापन की एक कॉपी स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे, शिक्षा राज्य मंत्री पंकज भोयर, स्कूल एजुकेशन और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, एजुकेशन कमिश्नर, महाराष्ट्र स्टेट प्रिसिपल्स एसोसिएशन के चेयरमैन, सेकेंडरी एजुकेशन डायरेक्टर नासिक डिवीजन के डिप्टी डायरेक्टर, माध्यमिक जिला परिषद नासिक के एजुकेशन ऑफिसर को भेजी गई है।

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