भारी बारिश से रेलवे ट्रैक पर जलजमाव (फोटो नवभारत) 
नासिक

नासिक जिले के इगतपुरी में मूसलाधार बारिश से रेलवे ट्रैक पर भारी जलजमाव, निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

Nashik Heavy Rain: इगतपुरी में मूसलाधार बारिश के बाद रेलवे ट्रैक पर जलजमाव हो गया। निकासी व्यवस्था में तकनीकी बदलाव को कारण माना जा रहा है। रेलवे ने पानी निकालने का काम तेज कर दिया है।

आलोक उमाकृष्ण

Nashik Heavy Rain Drainage Issue: नासिक जिले के इगतपुरी शहर में शुक्रवार 3 जुलाई से जारी मूसलाधार बारिश के कारण मध्य रेलवे के इगतपुरी रेलवे स्टेशन के पास शनिवार 4 जुलाई की सुबह रेलवे पटरियों पर बड़े पैमाने पर पानी जमा हो गया। बताया जा रहा है कि इस वर्ष रेलवे प्रशासन द्वारा बड़े नाले के पानी को एक छोटे नाले में मोड़ने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

रेलवे अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए जल निकासी की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी, ताकि ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित रहे और ट्रेनों का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सके। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

तकनीकी बदलाव बना जलभराव की वजह

स्थानीय नागरिकों और जानकारों के अनुसार, इस वर्ष रेलवे प्रशासन ने वर्षा जल निकासी की व्यवस्था में बदलाव करते हुए बड़े नाले के पानी का प्रवाह एक छोटे नाले की ओर मोड़ दिया। पहले ब्रिटिश काल में निर्मित बड़े नाले के माध्यम से बारिश का पानी आसानी से निकल जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में छोटे नाले की क्षमता कम होने के कारण भारी वर्षा का पानी आगे नहीं बढ़ सका और रेलवे पटरियों के आसपास जमा हो गया।

दोपहर बाद बारिश की तीव्रता कम होने से जलस्तर घटा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फिर से तेज बारिश हुई तो यही स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था का तकनीकी परीक्षण और आवश्यक सुधार किए जाते तो इस तरह की समस्या से बचा जा सकता था।

भविष्य के लिए स्थायी समाधान की मांग

रेलवे प्रशासन ने ट्रैक पर जमा पानी को हटाने के लिए युद्ध स्तर पर जल निकासी अभियान शुरू कर दिया है। पंपों और तकनीकी टीमों की मदद से पानी तेजी से निकाला जा रहा है, ताकि रेल संचालन पूरी तरह सुरक्षित बना रहे। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ट्रैक सुरक्षित है और किसी भी ट्रेन के संचालन पर असर नहीं पड़ा है।

वहीं, स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि केवल अस्थायी राहत उपायों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जल निकासी व्यवस्था का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि नालों की क्षमता बढ़ाने, नियमित सफाई कराने और पुराने जल निकासी मार्गों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने जैसे कदम समय रहते उठाए जाएं, तो भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी और यात्रियों को भी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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