कैसे त्र्यंबकेश्वर में प्रकट हुईं मां गंगा और क्यों कहलाती हैं दक्षिण की गंगा
महर्षि गौतम के श्राप से उपजी गोदावरी, त्र्यंबकेश्वर में क्यों एक साथ विराजे हैं ब्रह्मा-विष्णु-महेश?
त्र्यंबकेश्वर से जुड़ी है इसके उद्गम की यह दिलचस्प कहानी
Trimbakeshwar Jyotirlinga History: गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी पहाड़ियों (त्र्यंबकेश्वर) में स्थित एक कुंड से हुआ है। इस पावन नदी के जन्म से जुड़ी पौराणिक कहानी महर्षि गौतम और भगवान शिव की कथा पर आधारित है।
इसी पौराणिक कथा और वेद पुराणों में इस बात का भी उल्लेख है कि मां गंगा गौतम ऋषि का उद्धार करने के लिए जब गोदावरी के रूप में प्रकट होने लगी इस समय उन्होंने भगवान शिव भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु से त्रयंबकेश्वर मैं ही विराजमान होने की मांग की जिसके कारण भगवान शिव ब्रह्मा और विष्णु एक साथ त्र्यंबक राजा के रूप एक साथ विराजमान हुए और यही कारण है कि इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
ऋषियों की ईर्ष्या और छल: पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि गौतम और उनकी पत्नी अहिल्या ब्रह्मगिरी पर्वत पर आश्रम बनाकर रहते थे और वहां आने वाले साधु-संतों को भोजन कराते थे। महर्षि गौतम की बढ़ती ख्याति और पुण्य से ईर्ष्या करके कुछ अन्य ऋषियों ने उन्हें नीचा दिखाने की एक योजना बनाई।
गौ-हत्या का अनजाना पाप: उन ऋषियों ने अपनी माया से एक कमजोर और बीमार गाय का रूप बनाया और उसे महर्षि गौतम के धान के खेत में भेज दिया। जब गौतम ऋषि ने उस गाय को खेत से बाहर हटाने के लिए हाथ में एक तिनका लेकर उसे छुआ, तो वह गाय वहीं गिरकर मर गई।
पश्चाताप और कठोर तपस्या: इसे 'गौ-हत्या' का पाप मानकर सभी ऋषियों ने गौतम ऋषि को आश्रम से बाहर कर दिया। इस पाप के प्रायश्चित और मुक्ति के लिए गौतम ऋषि ने हजारों वर्षों तक भगवान शिव की कठोर तपस्या की।
शिव और गंगा का अवतरण: ऋषि की निस्वार्थ भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा। गौतम ऋषि ने मां गंगा को इस धरती पर प्रवाहित करने की प्रार्थना की, ताकि उनके पाप धुल सकें।
गोदावरी का प्रकट होना: भगवान शिव ने अपनी जटाओं से गंगा की धारा को वहां उतारा। चूंकि इस नदी का उद्गम एक 'गौ' (गाय) के उद्धार और पाप निवारण के लिए हुआ था, इसलिए इसका नाम गोदावरी पड़ा और महर्षि गौतम से जुड़े होने के कारण इसे गौतमी भी कहा जाने लगा।
मुख्य रूप से इसकी विशाल लंबाई, प्रायद्वीपीय भारत में सबसे बड़ी नदी होने और उत्तर भारत की गंगा के समान इसके अपार धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के कारण कहा जाता है। गोदावरी को इस नाम से पुकारे जाने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी: जिस प्रकार उत्तर भारत में गंगा सबसे लंबी और प्रमुख नदी है, उसी प्रकार गोदावरी दक्षिण भारत (प्रायद्वीपीय भारत) की सबसे लंबी नदी है (इसकी कुल लंबाई लगभग 1,465 किलोमीटर है)।
धार्मिक और पवित्रता का महत्व: हिंदू धर्म में गंगा नदी को जितना पवित्र माना जाता है, वैसा ही स्थान दक्षिण में गोदावरी को प्राप्त है। इसके तट पर त्र्यंबकेश्वर और नाशिक जैसे कई प्रसिद्ध तीर्थस्थल स्थित हैं।
पापमोचनी मान्यता: गंगा की तरह ही यह मान्यता है कि गोदावरी नदी में स्नान करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं।
वृद्ध गंगा: यह एक अत्यंत प्राचीन नदी है, इसलिए इसे कई बार 'वृद्ध गंगा' या पुरानी गंगा के नाम से भी संबोधित किया जाता है।