टमाटर खेती, भीषण गर्मी, डंपिंग ऑफ, नासिक किसान, फसल नुकसान, (सोर्स: सौजन्य AI) 
नासिक

नासिक में भीषण गर्मी ने बिगाड़ा टमाटर का खेल, अच्छे मुनाफे की टूटी उम्मीद; किसानों पर संकट गहराया

Nashik Farmers News: पिछले साल अच्छे दाम मिलने के बाद नासिक में बड़े पैमाने पर अगेती टमाटर की खेती हुई, लेकिन भीषण गर्मी व डंपिंग ऑफ रोग के कारण फसलें खराब होने लगी हैं, अब किसानों को नुकसान का डर है।

अंकिता पटेल

Nashik Tomato Farming: नासिक पिछले साल टमाटर के अच्छे दाम मिलने से उत्साहित होकर इस साल क्षेत्र के किसानों ने बड़े पैमाने पर अगेती (अर्ली) टमाटर की खेती शुरू की थी। लेकिन, लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और अत्यधिक तापमान के कारण टमाटर की फसलों पर डंपिंग ऑफ का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है, जिससे अगेती खेती पूरी तरह संकट में आ गई है।

नहीं मिला अपेक्षित उत्पादन

मानसून में देरी होने की वजह से खेतों में बिछाए गए मल्चिंग पेपर भीषण गर्मी के कारण अत्यधिक गर्म हो रहे है, जिसका सीधा घातक असर टमाटर के नए पौधों पर पड़ रहा है। महज एक महीने पहले लगाए गए पौधे अब बुरी तरह झुलसने लगे हैं। इस प्रतिकूल मौसम के चलते अब अपेक्षित उत्पादन मिलने की उम्मीद बेहद धुंधली हो गई है, जिससे परेशान होकर कई किसानों ने खराब हो चुके पौधों को उखाड़कर फेंकना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि पिछले साल टमाटर से हुए अच्छे मुनाफे को देखते हुए इस साल बुआई के रकबे में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

पौधों में रोग लगने से किसानों की बढ़ी चिंता

लेकिन रोपाई के महज 15 दिनों के भीतर ही गर्मी जनित बीमारियों के फैलने से किस्सनों की चिंताएं काफी बढ़ गई है। इसके साथ ही खेती की लागत मैं भी इस बार भारी इजाफा हुआ है। मल्चिंग पेपर, बांस, जुताई, पौधे और खादों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, वहीं डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रैक्टर से होने वाली जुताई का खर्च भी बढ़ा दिया है।

इसके चलते किसान चौतरफा आर्थिक संकट में घिर गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर मई के पहले सप्ताह से लेकर जून-जुलाई के दौरान मानसून सीजन के टमाटर की रोपाई की जाती है। लेकिन इस साल के रिकॉर्ड तोड़ तापमान, गुणवत्तापूर्ण मल्चिंग पेपर के अभाव और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण पौधों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। फिलहाल तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बने रहने के कारण टमाटर की फसल का टिक पाना बेहद मुश्किल हो गया है, जिसने उत्पादकों के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

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