Ashok Kharat Case Nashik: नासिक के बहुचर्चित ढोंगी तांत्रिक अशोक खरात का मामला दिन-ब-दिन और अधिक रहस्यमयी होता जा रहा है। अब तक ओशनो जल (Oshno Water) और इमली के बीजों (चिंचोके) जैसी अजीबोगरीब चीजों के मिलने के बाद, अब खरात के दफ्तर से एक काला पत्थर बरामद हुआ है। इस पत्थर ने न केवल पुलिस की जांच में पेच फंसा दिया है, बल्कि कोर्ट रूम में भी सरकारी और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच जोरदार खडाजंगी पैदा कर दी है।
बुधवार को अशोक खरात को उसके खिलाफ दर्ज 8वें अपराध के सिलसिले में अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने उस काले पत्थर को सबूत के तौर पर पेश किया, जो खरात के कार्यालय से मिला था। सरकारी वकील और जांच अधिकारी (SIT) ने दलील दी कि खरात इस काले पत्थर का उपयोग अंधविश्वास फैलाने या महिलाओं को सम्मोहित करने के लिए करता था। पुलिस ने कोर्ट से तीन दिन की और कोठडी मांगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पत्थर का असली मकसद क्या था। खरात के वकील ने पुलिस की मांग का कड़ा विरोध करते हुए तंज कसा। उन्होंने सवाल किया, एक पत्थर का पुलिस क्या जांच करेगी? क्या पत्थर भी गवाही देगा? वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर तुच्छ चीजों के नाम पर हिरासत अवधि बढ़ाना चाहती है।
जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि जब खरात से महिलाओं के साथ किए गए यौन अत्याचारों के बारे में पूछताछ की जाती है, तो वह जवाब देने के बजाय मन ही मन कुछ बुदबुदाने लगता है। पुलिस को शक है कि वह कोई मंत्र पढ़ता है या जांच को गुमराह करने के लिए नाटक कर रहा है। एसआईटी इस बात की भी जांच करना चाहती है कि अशोक खरात और पीड़िता के परिवार के बीच आर्थिक लेन-देन के क्या संबंध थे।
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दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहस सुनने के बाद, कोर्ट ने इस बार नासिक पुलिस की मांग को खारिज कर दिया। यह पहला मौका है जब अशोक खरात को पुलिस कोठरी नहीं दी गई। अदालत ने उसे 12 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश सुनाया है। हालांकि, पुलिस ने हार नहीं मानी है। खरात के खिलाफ दर्ज 9वें अपराध में उसका कब्जा (Custody) पाने के लिए एसआईटी ने दोबारा आवेदन किया है। अब सबकी नजरें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या पुलिस उसे फिर से अपनी हिरासत में ले पाती है या नहीं।