नासिक कुंभ मेला: कमिश्नर के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर से बनाया करोड़ों का वर्क ऑर्डर, एक गलती से पकड़ी गई चोरी

Nasik Kumbh Mela 2027: डॉ. प्रवीण गेडाम के फर्जी हस्ताक्षर से 35 करोड़ का फर्जी कार्य आदेश तैयार। नाम में स्पेलिंग की गलती से पकड़ा गया बड़ा घोटाला। नासिक पुलिस कर रही है मामले की जांच। 
Praveen Gedam Fake Digital Signature
प्रवीण गेडाम की चपलता ने बचाया नासिक कुंभ का संभावित फर्जीवाड़ा (फोटो क्रेडिट-X)
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Nashik Kumbh Mela Scam 2027: नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। इसी व्यस्तता का फायदा उठाकर अज्ञात जालसाजों ने सरकार को 35 करोड़ रुपये का चूना लगाने की साजिश रची थी। जालसाजों ने कुंभ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष और नासिक संभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग करते हुए सीसीटीवी सर्वेक्षण, स्थापना और रखरखाव के लिए एक बड़ा कार्य आदेश (Work Order) तैयार किया। यह आदेश ठाणे स्थित एक निजी एजेंसी के नाम पर बनाया गया था, लेकिन डॉ. गेदम की पैनी नजरों ने इसे समय रहते पकड़ लिया।

यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब नीलकंठ शेवाले नामक व्यक्ति 28 अप्रैल को संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुँचा और दो संदिग्ध पत्रों की सत्यता के बारे में पूछताछ की। उसने बताया कि ये पत्र उसे गजानन पाटिल-चव्हाण नामक व्यक्ति ने दिए थे। कुंभ मेला शाखा के सहायक अनुसंधान अधिकारी योगेश सोमवंशी को पत्रों के हाशिये (Margin) और सामग्री को देखकर संदेह हुआ और उन्होंने तुरंत इसे आयुक्त डॉ. गेडाम के संज्ञान में लाया।

'Praveen' बनाम 'Pravin': स्पेलिंग ने खोली पोल

जब डॉ. प्रवीण गेडाम ने पत्रों की बारीकी से जांच की, तो उन्हें अपने ही नाम की वर्तनी (Spelling) में अंतर दिखाई दिया। जालसाजों ने उनके नाम को 'Pravin' (प्रविन) लिखा था, जबकि उनके आधिकारिक डिजिटल हस्ताक्षर में स्पेलिंग 'Praveen' (प्रवीण) दर्ज है। इस सूक्ष्म त्रुटि को देखते ही आयुक्त समझ गए कि न केवल हस्ताक्षर फर्जी हैं, बल्कि पूरा कार्य आदेश ही जाली है। इस छोटी सी सजगता ने सरकार के 35 करोड़ रुपये को गलत हाथों में जाने से बचा लिया।

पुलिसिया कार्रवाई और मुख्य साजिशकर्ता की तलाश

इस घटना के बाद नासिक रोड पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज किया गया है। संभागीय आयुक्त के निजी सहायक विजय गोरख सोनावाने की शिकायत पर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े का असली मास्टरमाइंड कौन है। पुलिस उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जिनके माध्यम से ये फर्जी पत्र नीलकंठ शेवाले तक पहुँचे थे।

कुंभ मेले की पारदर्शिता पर सवाल

कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजन में करोड़ों रुपये के टेंडर और कार्य आदेश जारी किए जाते हैं। इस घटना ने प्रशासन को और अधिक सतर्क कर दिया है। डॉ. गेडाम की इस चपलता की चारों ओर प्रशंसा हो रही है, क्योंकि यदि यह कार्य आदेश आगे बढ़ जाता, तो यह नासिक कुंभ मेले के इतिहास का एक बड़ा वित्तीय घोटाला साबित हो सकता था। फिलहाल, पुलिस 'इनोवेटिव इंटेलिजेंस एआई ऑटोमेशन सॉल्यूशंस एजेंसी' की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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