प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI) 
नंदुरबार

नंदुरबार खाद घोटाला: 1000+ किसानों के नाम पर फर्जी बिक्री का भंडाफोड़, कृषि विभाग ने शुरू की कार्रवाई

Nandurbar Fertilizer Scam: नंदुरबार में 1,030 किसानों के नाम पर फर्जी खाद बिक्री का बड़ा खुलासा हुआ है। कृषि विभाग की जांच में कालाबाजारी की आशंका जताई गई है, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

आकाश मसने

Nandurbar Fertilizer Scam Agriculture Department Action: महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले से किसानों के साथ धोखाधड़ी और खाद की कालाबाजारी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कृषि विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि जिले के लगभग 1,030 किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से खाद की बिक्री दर्ज की गई है। इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जिला परिषद के कृषि विभाग ने व्यापक जांच अभियान छेड़ दिया है।

बिना बुवाई के ही कागजों पर उठ गया खाद

इस धोखाधड़ी का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिन किसानों के नाम पर खाद की खरीद दिखाई गई है, उनके खेतों में उस विशेष अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की फसल की बुवाई ही नहीं हुई थी। इसके बावजूद, सरकारी रिकॉर्ड और कृषि सेवा केंद्रों के दस्तावेजों में उनके नाम पर भारी मात्रा में खाद का उठाव दिखाया गया है। अब विभाग इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि यह बिक्री वास्तव में किस स्तर पर हुई और इसमें किन-किन लोगों की मिलीभगत है।

कृषि विभाग की सख्त कार्रवाई

इस मामले के उजागर होने के बाद कृषि विभाग सक्रिय हो गया है। जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक नंदुरबार जिले के 102 कृषि सेवा केंद्रों की सघन जांच की जा चुकी है। इसके साथ ही, जिन 1,030 किसानों के नाम इस संदिग्ध सूची में शामिल हैं, उनके पास जाकर सहायक कृषि अधिकारी भौतिक सत्यापन (Verification) कर रहे हैं। जांच के दौरान खाद की बिक्री में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, जिसके आधार पर दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। अधिकारियों को अंदेशा है कि यह खाद की बड़े पैमाने पर की जा रही कालाबाजारी का हिस्सा हो सकता है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

इस संकट के बीच, कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक रहने की सलाह दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसान केवल अपनी फसल क्षेत्र की आवश्यकता के अनुसार ही खाद खरीदें। साथ ही, किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए केवल अधिकृत कृषि सेवा केंद्रों से ही लेन-देन करें और अनिवार्य रूप से ई-पॉस (e-POS) मशीन के माध्यम से ही रसीद प्राप्त करें।

किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए कृषि आयुक्तालय स्तर और जिला स्तर पर शिकायत निवारण कक्ष स्थापित किए गए हैं। यदि किसी किसान को लगता है कि उसके नाम का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो वह तुरंत इन केंद्रों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। एक महीने के भीतर इतनी बड़ी संख्या में फर्जीवाड़े के मामले सामने आना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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