Inspector Santosh Vaijnath Kendre Sukhbir Badal Nanded Attack: महाराष्ट्र के ऐतिहासिक नांदेड़ स्थित माता साहिब गुरुद्वारे के बाहर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले में एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
इस घटना में अगर सबसे बड़ी और निर्णायक भूमिका किसी की रही, तो वे हैं महाराष्ट्र पुलिस के जांबाज इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्रे अपनी जान जोखिम में डालकर हमलावर के वार को विफल करने वाले इंस्पेक्टर संतोष की तत्परता की अब पूरे देश में सराहना हो रही है। शुक्रवार को सांसद हरसिमरत कौर बादल ने स्वयं उनसे मुलाकात कर उनका आभार जताया।
संतोष वैजनाथ केंद्रे महाराष्ट्र पुलिस विभाग के एक बेहद अनुशासित और अनुभवी पुलिस अधिकारी हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में एक कांस्टेबल के रूप में महाराष्ट्र पुलिस बल में अपना सेवा सफर शुरू किया था।
अपनी कड़ी मेहनत, उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और विभागीय निष्ठा के बल पर वे पदोन्नत होकर इंस्पेक्टर (PI) के पद तक पहुंचे। वर्तमान में वे नांदेड़ में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थे और सुखबीर सिंह बादल के दौरे के दौरान सुरक्षा घेरे में तैनात थे।
13 अगस्त 2026 की दोपहर करीब 1:45 बजे जब सुखबीर बादल माता साहिब गुरुद्वारे में मथा टेककर बाहर निकल रहे थे, तभी शॉल के नीचे धारदार कृपाण छिपाकर खड़े आरोपी जसपाल सिंह (निहंग) ने बादल के पेट को निशाना बनाकर सीधा वार करने की कोशिश की।
अत्यंत सतर्क खड़े इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्र की नजर हमलावर की संदिग्ध गतिविधि पर पड़ गई। बिना एक सेकंड भी गंवाए, इंस्पेक्टर संतोष सीधे हमलावर और सुखबीर बादल के बीच कूद पड़े। उन्होंने हमलावर के हाथ को मोड़ने का प्रयास किया, जिससे कृपाण का रुख बदल गया। इस धक्का-मुक्की में सुखबीर बादल और स्वयं इंस्पेक्टर संतोष के हाथ में चोट आई, लेकिन बड़ा जानलेवा वार टल गया।
घटना के बाद अस्पताल में भर्ती घायल इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ से मिलने पंजाब की पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद हरसिमरत कौर बादल पहुंचीं। उन्होंने भावुक होकर इंस्पेक्टर केंद्र की जांबाजी की प्रशंसा की और पूछा कि क्या बादल परिवार उनके इस उपकार के बदले कुछ कर सकता है?
इस पर बेहद विनम्रता से इंस्पेक्टर संतोष ने कहा, "मैडम, मैंने केवल अपना कर्तव्य निभाया है। पुलिसकर्मियों को ऐसी ही आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। मेरे पास निर्णय लेने के लिए सेकंड का बेहद छोटा हिस्सा था और मैंने वही किया जो एक पुलिसकर्मी को करना चाहिए।"