कोयला खदान (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

CBI चौकस, CVO ऑफिस फेल, WCL में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़, अधिकारियों के लिए 'कुबेर का खजाना' बनी कंपनी?

WCL Nagpur Corruption: CBI ने WCL नागपुर पर कड़ी कार्रवाई की, जबकि CVO ऑफिस चुप रहा। कोयला तस्करी से लेकर मेडिकल बिलिंग घोटालों तक, भ्रष्टाचार के मामलों ने अंदरूनी निगरानी की कमी को उजागर किया है।

प्रिया जैस

CBI Raid WCL: वेस्टर्न कोल्ड फील्ड लि. (वेकोलि) विदर्भ का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) के रूप में जाना जाता है। हजारों की संख्या में कर्मचारी हैं और हजारों करोड़ रुपये का टर्नओवर कर रहा है। निश्चित रूप से वेकोलि के कारण विदर्भ की अर्थव्यवस्था को बूस्ट भी मिलता है परंतु पिछले कुछ समय में यह देखने को मिल रहा है कि वेकोलि जनता और सरकार के लिए कम, अधिकारियों के लिए ‘कुबेर’ का खजाना बन गया है।

वेकोलि अधिकारियों के लिए कुबेर का खजाना न बने, इसके लिए मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के साथ-साथ पूरी यंत्रणा तैयार की गई है। सीवीओ कार्यालय का मूल कार्य ही है भ्रष्टाचार पर नजर रखना और उसे रोकना परंतु सीवीओ कार्यालय अपने उद्देश्य में फेल हो गया है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जबरदस्त एक्टिव हो गई है। सीबीआई को एक के बाद एक सफलता मिल रही है।

वेकोलि में भ्रष्टाचार के सारे पोल तार-तार हो रहे हैं। दवाखाना हो, वाशरी हो या फिर क्षेत्रीय कार्यालय; हर जगह रिश्वत लेने की होड़ मची हुई है। अधिकारी वेकोलि की प्रतिष्ठा को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। खास बात यह कि इतना सब कुछ होते हुए भी सीवीओ खामोश है और तमाशा देख रहा है।

कई वर्षों से डटे

कहा जाता है कि बहता पानी हमेशा स्वच्छ रहता है परंतु सीवीओ पिछले कई वर्षों से वेकोलि में डटे हुए हैं। न तो वे किसी को पकड़ पा रहे हैं और न ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पाने में सफल हुए हैं। न ही, उनके कार्यकाल के इतने वर्षों में ऐसा देखने को मिला हो कि किसी एक ‘चपरासी’ पर भी कार्रवाई हुई है। यही कारण है कि सीबीआई के लगातार हमलावर होने और सफलता हासिल करने पर लोग अब तरह-तरह की बातें करने लगे हैं। सभी इस कार्यालय की कार्यप्रणाली और औचित्य पर सवाल भी उठाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इस कार्यालय के अस्तिव विहीन होने के कारण ही वेकोलि में पग-पग पर भ्रष्टाचार बढ़ गया है। हर कार्यक्रम में शोभा बढ़ाना ही उनका कार्य है।

स्टीम कोयले की हेराफेरी

वेकोलि वणी नार्थ भालर क्षेत्र के घोन्सा कोयला खदान में मिक्स कोल के नाम पर स्टीम कोयले की ज़बरदस्त कालाबाज़ारी का काला खेल चल रहा था। सरकार और कंपनी को करोड़ों का नुकसान हो रहा था। वाशरी के नाम पर चल रहे खेल का भंडाफोड़ सीबीआई को करनी पड़ी। डीओ धारक से 25% प्रति टन साइनिंग अमाउंट लेकर हज़ारों-लाखों मीट्रिक टन कोयला दिया जाता है। इस मामले में बड़ा खेल का खुलासा सीबीआई ने किया है।

21 दिसंबर को वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नी पर केस दर्ज

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गत 21 दिसंबर को ही वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मामला दर्ज किया था। इस वजह से सरकारी कंपनियों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई। एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत संदीप सिंह और उनकी पत्नी श्वेता सिंह इस मामले में आरोपी हैं। दोनों नागपुर के काटोल रोड क्षेत्र में निवास करते हैं। 17 सितंबर को ही वेकोलि मुख्यालय स्थित डिस्पेंसरी में सीबीआई ने रेड की थी। एक चिकित्सक को पकड़ा गया था और पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया गया। जाली बिल का खेल कर करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप लगाया गया था। इसमें भी कई वरिष्ठ अधिकारियों के लिप्त होने की जानकारी सामने आई थी। सीवीओ को हवा तक नहीं लगी थी।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट

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