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VHA के हॉकी मैदान को जून की रिपोर्ट में खेलने के लिए अनुपयुक्त बताया गया था।
अब उसी मैदान पर जिला खेल विभाग शालेय हॉकी स्पर्धाएं आयोजित कर रहा है।
2037 तक की लीज होने के बावजूद 3.80 हेक्टेयर नजूल जमीन का पट्टा रद्द किया गया।
अपर विभागीय आयुक्त ने VHA की अपील खारिज कर कलेक्टर का आदेश बरकरार रखा।
VHA ने मैदान पर कार्रवाई रोकने के लिए प्रशासन को पत्र देने की जानकारी दी है।
VHA Nagpur Hockey Ground: विदर्भ हॉकी एसोसिएशन VHA) के अमरावती रोड स्थित हॉकी मैदान को लेकर चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले रहा है। जिस मैदान को जून माह में जिला प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट में जिला खेल विभाग ने खेलने के लिहाज से अनुपयुक्त बताया था।
उसी मैदान पर अब जिला खेल विभाग शालेय हॉकी स्पर्धाओं का आयोजन कर रहा है। चार महीने में मैदान की स्थिति को लेकर बदले इस रुख ने पूरी कार्रवाई की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेल गलियारों में चर्चा है कि कहीं VHA से मैदान खाली कराने के लिए खामियों को हथियार तो नहीं बनाया गया ?
वीएचए को मैदान की लीज वर्ष 2037 तक मिली हुई थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने लीज समय से पहले समाप्त करने की कार्रवाई की। तत्कालीन जिला खेल अधिकारी पल्लवी धात्रक की रिपोर्ट में मैदान की असमतल जमीन, गड्डों, रखरखाव की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का उल्लेख किया गया था।
इसी घटनाक्रम के बीच नजूल विभाग ने मैदान पर कब्जे को लेकर नोटिस जारी किया। अब उसी मैदान पर शालेय हॉकी के आयोजन ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता और कार्रवाई के आधार को चर्चा में ला दिया है। यदि मैदान खेलने योग्य नहीं था तो अब वहां स्पर्धा कराने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? यदि मैदान पर हॉकी खेली जा सकती है तो पहले उसे अनुपयुक्त बताने वाली रिपोर्ट कितनी सही थी।
विदर्भ हॉकी एसोसिएशन मैदान का विवाद अब केवल लीज और जमीन तक सीमित नहीं रहा, जिस तरह रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढी और अब उसी मैदान पर खेल गतिविधियों की तैयारी है।
उससे यह चर्चा तेज हुई है कि कहीं इस पूरे प्रकरण में वीएचए को कमजोर कर मैदान पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश तो नहीं हो रही? क्या तत्कालीन डीएसओ पर दबाव बनाकर रिपोर्ट तैयार कराई गई थी।
विदर्भ हॉकी एसोसिएशन के प्रशासक त्रिलोकीनाथ सिधरा ने भी मैदान पर कब्जे की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव में अधिकारियों से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक सपर्क करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला।
विदर्भ हॉकी एसोसिएशन को कानूनी मोर्वे पर भी झटका लगा है, अपर विभागीय आयुक्त ने महाराष्ट्र जमीन राजस्व संहिता, 1966 की धारा 247 के तहत दायर अपील खारिज करते हुए कलेक्टर का आदेश कायम रखा। इसके तहत 3.80 हेक्टेयर नजूल जमीन का भाडेपट्टा रद्द कर जमीन शासन के कब्जे में लेने का फैसला किया गया।
तत्कालीन DSO पल्लवी धात्रक ने बताया कि उन्होंने दो अधिकारियों की जांच के बाद मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट तैयार की थी, वर्तमान प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी शशिकांत कलंबे ने कहा कि रिपोर्ट उनके कार्यकाल में नहीं बनी थी।
विदर्भ हॉकी एसोसिएशन के समन्वयक कृष्णा जोशी ने बताया कि मैदान एकदम सही है। बच्चों के लिए डीएसओ अनुमति भी वीएचए द्वारा ही दी गई है। अपर विभागीय आयुक्त के पास से 28 सितंबर को अपील खारिज होने के बाद हमने अपर विभागीय आयुक्त, कलेक्टर और तहसीलदार को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि अभी हमारे पास अपील करने के लिए समय है। तब तक मैदान पर कार्रवाई न की जाए।