Adivasi Adhikar Bachao Kruti Samiti: महाराष्ट्र में आदिवासी विद्यार्थियों के सरकारी छात्रावासों के संचालन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। आदिवासी अधिकार बचाव कृति समिति ने राज्य सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए स्व. लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था (मानकर ट्रस्ट) के साथ आदिवासी विद्यार्थियों के 490 सरकारी छात्रावासों के संचालन को लेकर किए गए करार को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
समिति ने सोमवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार को चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने आदिवासी विद्यार्थियों द्वारा RSS मुख्यालय के घेराव की भी चेतावनी दी है।
समिति का आरोप है कि आदिवासी विद्यार्थियों के लिए संचालित सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था को लेकर सरकार का निर्णय विद्यार्थियों के हित में नहीं है। संगठन ने मानकर ट्रस्ट के साथ किए गए करार को तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आदिवासी विद्यार्थियों के छात्रावासों की व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। सरकार को विद्यार्थियों की शिक्षा और रहने की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।
समिति ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास, पर्याप्त और पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
समिति ने संविधान के अनुच्छेद 46 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों को विशेष रूप से बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इसी संवैधानिक जिम्मेदारी के अनुरूप छात्रावासों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में समिति ने 25 अप्रैल 2018 के DBT शासन निर्णय की समीक्षा करने अथवा उसे रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही आदिवासी विद्यार्थियों को नियमित रूप से पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए स्वतंत्र और स्पष्ट प्रावधान करने की मांग भी रखी गई है।
समिति का कहना है कि विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी तरह की अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए और भोजन जैसी बुनियादी जरूरत के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
सोमवार के आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला। इनमें गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, बिरसा मिसाइल फोर्स, बिरसा ब्रिगेड, आइसा, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई), बहुजन समाज पार्टी, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई और आम आदमी पार्टी सहित विभिन्न महिला संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे।
प्रदर्शन में भावना इरपाची, रजत महेशगवली, राकेश भलावी, रेखा कोराम, ईशान कनकि, हरीश उईके, शंभू गौड़, सुजाता मसराम, प्रशिक गाडगे, रोहित इरपाची, प्रकाश कुंभे, क्षितिज गायकवाड़, दिनेश सिडाम, साहिली झंझाडे, करण गजभिये और प्रशिल कोड़ापे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
समिति ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि 10 दिन के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके तहत आदिवासी विद्यार्थियों द्वारा RSS मुख्यालय के घेराव की चेतावनी भी दी गई है।
अब सरकार इस अल्टीमेटम पर क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर है। फिलहाल छात्रावासों के संचालन का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है।