NIT मुख्यालय परिसर में बिना रसीद वसूला जा रहा पार्किंग शुल्क, अफसरों की नाक के नीचे चल रही अवैध उगाही

Nagpur Improvement Trust Parking: नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) मुख्यालय में पार्किंग ठेकेदार बिना रसीद के पैसे वसूल रहा है और रसीद मांगने पर दबंगई कर रहा है, जिससे प्रशासनिक शह का संदेह गहरा गया है।
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नागपुर सुधार प्रन्यास की ईमारत(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Illegal Parking Collection In Nagpur Improvement Trust: नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) के मुख्यालय परिसर में पार्किंग व्यवस्था के नाम पर वाहन चालकों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है। नासुप्र प्रशासन द्वारा पार्किंग का ठेका निजी वेंडर को दिए जाने के बावजूद व्यवस्था में पारदर्शिता पूरी तरह नदारद है। हद तो यह है कि जिस परिसर में नासुप्र के सभापति, ट्रस्टी और तमाम प्रथम श्रेणी के वरिष्ठ अधिकारी बैठते हैं, ठीक उसी के नीचे वाहन चालकों से निर्धारित शुल्क तो वसूला जा रहा है, लेकिन इसके बदले कोई वैध रसीद या पार्किंग स्लिप नहीं दी जा रही।

रसीद मांगी तो कर्मचारियों की दबंगई

मुख्यालय में अपने काम के सिलसिले में आने वाले वाहन चालक जब भुगतान की पर्ची मांगते हैं, तो पार्किंग स्टैंड के कर्मचारी कथित तौर पर दबंगई पर उतर आते हैं और उन्हें बिना रसीद दिए आगे बढ़ने पर मजबूर कर देते हैं। रसीद न मिलने से सीधा सवाल यह उठता है कि क्या वसूला जा रहा पैसा ठेकेदार की जेब में जा रहा है या नासुप्र के खजाने में? बिना रसीद के daily कलेक्शन का पारदर्शी लेखा-जोखा नासुप्र को कैसे प्रस्तुत किया जा रहा है, इसे लेकर पूरी व्यवस्था की साख और अधिकारियों की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पार्किंग के नाम पर सिर्फ वसूली, सहयोग शून्य

रसीद न मिलने के अलावा अव्यवस्था की दूसरी बड़ी समस्या वाहनों को कहीं भी खड़ा कर देना है। स्टैंड कर्मचारी अधिक गाड़ियां घुसाने के चक्कर में वाहनों को बीच रास्ते में ब्लॉक कर देते हैं। जब कोई व्यक्ति अपना वाहन निकालने आता है, तो उसे रास्ता दिलाने या आगे-पीछे खड़ी गाड़ियां हटवाने के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं होता। पार्किंग शुल्क वसूलने के बाद भी वाहनों की सुरक्षा और व्यवस्थित पार्किंग की कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

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पारदर्शिता पर उठे सवाल, उठ रही जांच की मांग

पिछले कई दिनों से लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद नागपुर सुधार प्रन्यास प्रशासन ने इस ओर से आंखें मूंद रखी हैं। नागरिकों का कहना है कि जब मुख्यालय जैसे मुख्य प्रशासनिक स्थल पर यह हाल है, तो शहर के अन्य इलाकों का क्या होगा? अब जनता मांग कर रही है कि पार्किंग ठेकेदार को जारी की गई शर्तों को सार्वजनिक किया जाए और रसीद न देने वाले वेंडर का ठेका रद्द कर उस पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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