Maharashtra Tiger Population 2026: नागपुर राज्य में बाघों की संख्या वर्ष 2014 में 190 थी। वर्ष 2026 में इनकी संख्या 600 से अधिक होने की संभावना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताई। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने इस बात का उल्लेख किया।
सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य में बाघों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाघ संरक्षण कार्य किया जा रहा है। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक नई योजना तैयार की गई है। सरकार मूल्य आधारित बाघ संरक्षण के लिए भी प्रयासरत है।
इस अवसर पर वन मंत्री गणेश नाईक, राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, वित्त एवं योजना राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, प्रवीण परदेशी, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैस्कर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्रीनिवास राव और कंबोडिया, भूटान और बांग्लादेश के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सीएम फडणवीस ने आगे कहा कि बाघों का संरक्षण पर्यावरण और वनों की रक्षा करता है, इसीलिए राज्य में बाघ संरक्षण का कार्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चल रहा है।
राज्य के 6 बाघ अभ्यारण्यों के कोर क्षेत्रों से गांवों को विस्थापित किया गया है और नए बफर जोन बनाए गए हैं। वन विभाग की नई नीति के कारण बाघ अभ्यारण्यों के निकट रहने वाले ग्रामीणों ने पनर्वास और विस्थापन की पहल की है। बाघ अभ्यारण्यों के निकट के गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक सुनियोजित दृष्टिकोण तैयार किया गया है।
बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैकिंग और एआई-आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम जैसे उपाय किए गए हैं। इससे बाघों के संरक्षण, जैव विविधता और पर्यटन के लिए एक नया पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है। परिणामस्वरूप राज्य में बाघों की संख्या 2014 में 190 से बढ़कर अब 444 हो गई है। नई बाघ जनगणना में यह संख्या 600 से अधिक हो जाएगी।
बाघ संरक्षण के लिए 5 सिद्धांत तैयार किए गए हैं जिनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना,बाघ आवास हरित आजीविका मिशन को लागू करना, बाघ संरक्षण के लिए सीएसआर निधि उपलब्ध कराने हेतु सीएसआर नीति तैयार करना, सतत पर्यटन नीति बनाकर रोजगार सृजन करना और पर्यटन को बढ़ावा देते हुए वन संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराना शामिल है।
वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में वन विभाग का चेहरा-मोहरा बदल रहा है। वन विभाग के विकास के लिए सभी का सहयोग मिल रहा है।
यही कारण है कि बाघ संरक्षण के साथ-साथ नई अवधारणाओं को लागू करते हुए वन विभाग का काम आगे बढ़ रहा है। विभाग ने राज्य में 300 करोड़ पौधारोपण का संकल्प लिया है और अधिकतम संख्या में पौधे तैयार करने के लिए राज्य के 5 स्थानों पर टिशू कल्चर प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष सम्मेलन राज्य में बाघ परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देगा और रोजगार सृजित करेगा तथा आने वाले दिनों में ऐसे आयोजन व्यापक रूप से फैलेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए जो वन विभाग और बाघ संरक्षण की भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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यह समझौता ज्ञापन आईआरसीटीसी और वन विभाग के बीच सतत वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हस्ताक्षरित किया गया था।
एचडीएफसी बैंक की परिवर्तन सीएसआर पहल के माध्यम से पारशिवनी तालुका में समृद्धि परियोजना को लागू करने के लिए बाईएफ और वन विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
सतत पर्यटन पर आधारित एक 5 सितारा लक्जरी परियोजना विकसित करने के लिए आरोहा ग्रुप, महिंद्रा हॉलिडेज एंड रिसॉर्ट्स इंडिया लिमिटेड और महाराष्ट्र वन विभाग के बीच कुल 11 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।